Ки меравад ба шафоат ки дӯсти бозорд
که میرود به شفاعت که دوست بازآرد
Ки айши хилват бе ӯ кудуратӣ дорад
که عیش خلوت بی او کدورتی دارد
Киро маҷоли сухан гуфтанаст ба ҳазрат ӯ
که را مجال سخن گفتن است به حضرت او
Магари насими сабо кин паёми бгзорд
مگر نسیم صبا کاین پیام بگزارد
Ситезаи бурдан бо дӯстон ҳамин мисласт
ستیزه بردن با دوستان همین مثلست
Ки ташнаи чашмаи ҳайвон ба гули бинборд
که تشنه چشمه حیوان به گِل بینبارد
Маро ки гуфт дил аз ёр меҳрбон бурдор
مرا که گفت دل از یار مهربان بردار
Ба эътимоди сабурӣ ки шавқ нагузорад
به اعتماد صبوری که شوق نگذارد
Ки гуфт ҳар чаҳ бибинӣ з хотират баравад
که گفت هر چه ببینی ز خاطرت برود
Марои тамом яқин шуд ки саҳви пиндорад
مرا تمام یقین شد که سهو پندارد
Ҳароми бод бар он кас нишаст бо маъшӯқ
حرام باد بر آن کس نشست با معشوق
Ки аз сари ҳамаи бархестан наме ёрад
که از سر همه برخاستن نمییارد
Дуруст ноед аз он муддаии ҳақиқати ишқ
درست ناید از آن مدعی حقیقت عشق
Ки дар мувоҷиҳа теғаш зананду сари хорад
که در مواجهه تیغش زنند و سر خارد
Ба коми душманам эй дӯсти ин чунин магузор
به کام دشمنم ای دوست این چنین مگذار
Кас ин кунад ки дили дӯстони бёзорд
کس این کند که دل دوستان بیازارد
Биё ки дар қидмати аўФтм ва гар бикашӣ
بیا که در قدمت اوفتم و گر بکشی
Намирад он ки ба дасти ту рӯҳ бисипорад
نمیرد آن که به دست تو روح بسپارد
Ҳикояти шаби ҳиҷрон ки боздонд гуфт
حکایت شب هجران که بازداند گفت
Магар касе ки чу саъдии ситораи бишуморад
مگر کسی که چو سعدی ستاره بشمارد