Гар аз ҷафои ту рӯзии дилами бёзорд
گر از جفای تو روزی دلم بیازارد
Каманди шавқи кшонм ба сулҳи бози орад
کمند شوق کشانم به صلح باز آرد
зи дарди ишқи ту дӯшами умед субҳ набӯд
ز درد عشق تو دوشم امید صبح نبود
Асири ишқ чаҳ тоби шаби дарози орад
اسیر عشق چه تاب شب دراز آرد؟
Дилӣ аҷаб набӯд гар бсухт котши тез
دلی عجب نبود گر بسوخت کآتش تیز
Чаҳ ҷои мум ки пӯлод дар гудози орад
چه جای موم که پولاد در گداز آرد
Туе кигар бхромди дарахти қомати ту
تویی که گر بخرامد درخت قامت تو
зи рашки сарви равонро ба эҳтизози орад
ز رشک سرو روان را به اهتزاز آرد
Дигар ба рӯй худ аз халқ дар бихоҳам баст
دگر به روی خود از خلق در بخواهم بست
Магар касе зи туами муждае фарози орад
مگر کسی ز توام مژدهای فراز آرد
Агар қабул кунӣ сар наҳем бар қидмат
اگر قبول کنی سر نهیم بر قدمت
Чу бути параст ки дар пеши бути намози орад
چو بتپرست که در پیش بت نماز آرد
Яке ба самъи ризои гӯши дил ба саъдии дор
یکی به سمع رضا گوش دل به سعدی دار
Ки сӯзи ишқи суханҳои длнўози орад
که سوز عشق سخنهای دلنواز آرد