Оҳ агар дасти дили ман ба таманно нарасад
آه اگر دستِ دلِ من به تمنا نرسد
ё дил аз чанбари ишқи ту ба ман вонрсд
یا دل از چنبرِ عشقِ تو به من وا نرسد
Ғами ҳиҷрон ба сӯяттар аз ин қисмат кун
غم هجران به سَویّتتر از این قسمت کن
Кин ҳамаи дард ба ҷони ман танҳо нарасад
کاین همه درد به جانِ منِ تنها نرسد
Срўболои многар ба чамани бргзрӣ
سروبالای منا! گر به چمن بَر گذری
Сарви болои туро сарв ба боло нарасад
سروِ بالای تو را سرو به بالا نرسد
Чун туеро чу манӣ дар назар ояд ҳайҳот
چون تویی را چو منی در نظر آید هیهات
Ки қиёмат расад ин ришта ба ҳам ё нарасад
که قیامت رسد این رشته به هم یا نرسد
з осмон бигузарам ар бар миннат уфтад назарӣ
زآسمان بگذرم اَر بر منت اُفتد نظری
Зарра то меҳр набинад ба сурайё нарасад
ذره تا مِهر نبیند به ثریا نرسد
Бар сар хон лабати даст чу ман дарвешӣ
بر سر خوانِ لبت دستِ چو من درویشی
Ба гадоӣ расад охир чу ба яғмо нарасад
به گدایی رسد آخر چو به یغما نرسد
Абри чашмонам агар қатра чунин хоҳад рехт
ابرِ چشمانم اگر قطره چنین خواهد ریخت
Булъаҷаб дорам агар сайл ба дарё нарасад
بوالعجب دارم اگر سیل به دریا نرسد
Ҳиҷр бипасандам агар васл муяссар нашавад
هجر بِپْسندم اگر وصل میسر نشود
Хор бурдорам агар даст ба хурмо нарасад
خار بردارم اگر دست به خرما نرسد
Саъдёи конгресс васл баландаст ва ҳар онк
سعدیا! کنگرهٔ وصل بلندست و هر آنک
Пой бар сар наниҳад дасти ваии он ҷо нарасад
پای بر سر ننهد دست وی آن جا نرسد