Аз ин таъаллуқи беҳуда то ба ман чаҳ расад
از این تعلق بیهوده تا به من چه رسد
Вазон ки хӯни дилами рехт то ба тан чаҳ расад
وز آن که خون دلم ریخت تا به تن چه رسد
Ба гирди пой самандаш намерасад муштоқ
به گَرد پای سمندش نمیرسد مشتاق
Ки дстбўс кунад то бидон даҳан чаҳ расад
که دستبوس کند تا بدان دهن چه رسد
Ҳама ?хитой манаст ин ки меравад бар ман
همه خطای منست این که میرود بر من
зи дасти хештанам то ба хештан чаҳ расад
ز دست خویشتنم تا به خویشتن چه رسد
Биё кигар ба гиребон ҷон расад дастам
بیا که گر به گریبان جان رسد دستم
зи шавқ пора кунам то ба перҳан чаҳ расад
ز شوق پاره کنم تا به پیرهن چه رسد
Ки дид ранги баҳорӣ ба ранги рухсорат
که دید رنگ بهاری به رنگ رخسارت؟
Ки оби гули бабрад то ба ёсуман чаҳ расад
که آب گل ببرد تا به یاسمن چه رسد
Рақиб кист ки дар моҷарои хилвати мо
رقیب کیست که در ماجرای خلوت ما
Фириштаи раҳи набард то ба аҳриман чаҳ расад
فرشته ره نبرد تا به اهرمن چه رسد
з ҳар набот ки ҳасанӣ ва манзарӣ дорад
ز هر نبات که حسنی و منظری دارد
Ба сарви қомати он нозанини бадан чаҳ расад
به سروقامت آن نازنین بدن چه رسد
Чу хусрав аз лаби ширин наме баради мақсӯд
چو خسرو از لب شیرین نمیبرد مقصود
Қиёс кун ки ба Фарҳоди кӯҳкан чаҳ расад
قیاس کن که به فرهاد کوهکن چه رسد
Закоти лаъли лабатро басӣ талабкоранд
زکات لعل لبت را بسی طلبکارند
Миёни ин ҳамаи хоҳандагон ба ман чаҳ расад
میان این همه خواهندگان به من چه رسد
Расед нолаи саъдӣ ба ҳар ки дар офоқ
رسید نالهٔ سعدی به هر که در آفاق
Вагар абир насузад ба анҷуман чаҳ расад
و گر عبیر نسوزد به انجمن چه رسد