Туро самоъ набошад ки сӯз ишқ набӯд
تو را سماع نباشد که سوز عشق نبود
Гумон мабар ки барояд зи хоми ҳаргизи дӯд
گمان مبر که برآید ز خام هرگز دود
Чу ҳар чаҳ мерасад аз даст ӯст фарқӣ нест
چو هر چه میرسد از دست اوست فرقی نیست
Миёни шарбати нӯшину теғи заҳролӯд
میان شربت نوشین و تیغ زهرآلود
Насими боди сабои буии ёр ман дорад
نسیم باد صبا بوی یار من دارد
Чу бод хоҳам аз ин пас ба буи ӯ паймӯд
چو باد خواهم از این پس به بوی او پیمود
Ҳамеи гузашт ва назар кардамаш ба гӯшаи чашм
همیگذشت و نظر کردمش به گوشه چشم
Ки як назари брбоими марои зи ман брбўд
که یک نظر بربایم مرا ز من بربود
Ба сабри хостами аҳволи ишқи пӯшидан
به صبر خواستم احوال عشق پوشیدن
Дигар ба гул натавонистам офтоб андӯд
دگر به گِل نتوانستم آفتاب اندود
Савори ақл ки бошад ки пушт нанамояд
سوار عقل که باشد که پشت ننماید
Дар он мақом ки султони ишқ рӯй намӯд
در آن مقام که سلطان عشق روی نمود
Паёми мо ки расонад ба хизматаш ки ризо
پیام ما که رساند به خدمتش که رضا
Ризоӣ туаст гарми хастаи дорӣ ар хушнӯд
رضای توست گرم خسته داری ار خشنود
Шабӣ нарафт ки саъдӣ ба доғ ишқ нагуфт
شبی نرفت که سعدی به داغ عشق نگفت
Дигар шаб омад ва кӣ бе ту рӯз хоҳад буд
دگر شب آمد و کی بی تو روز خواهد بود