Маро чу орзӯӣ рӯй он нигор ояд
مرا چو آرزوی روی آن نگار آید
Чу булбулами ҳаваси нолаҳои зор ояд
چو بلبلم هوس نالههای زار آید
Миёни анҷуман аз лаъл ӯ чу орми ёд
میان انجمن از لعل او چو آرم یاد
Марои сиришк чу ёқӯт дар канор ояд
مرا سرشک چو یاقوت در کنار آید
зи ранги лолаи маро рӯй дилбар ояд ёд
ز رنگ لاله مرا روی دلبر آید یاد
зи шакли сабзаи марои ёди хат ёр ояд
ز شکل سبزه مرا یاد خط یار آید
Гулӣ ба даст ман ояд чу рӯй ту ҳайҳот
گلی به دست من آید چو روی تو هیهات
Ҳазор сол дигаргар чунин баҳор ояд
هزار سال دگر گر چنین بهار آید
Хасон хуранд бар аз боғи васл ӯу маро
خسان خورند بر از باغ وصل او و مرا
зи гулистони ҷамолаши насиб хор ояд
ز گلستان جمالش نصیب خار آید
Тамаъи мадори висолӣ ки бефироқ буд
طمع مدار وصالی که بیفراق بود
Ҳроинаҳи пас ҳар масте хумор ояд
هرآینه پس هر مستیی خمار آید
Марои замонаи зи ёрон ба манзилии андохт
مرا زمانه ز یاران به منزلی انداخت
Ки розӣам ба насимӣ каз он диёр ояд
که راضیم به نسیمی کز آن دیار آید
Фироқи ёр ба як бори бехи сабри бикунад
فراق یار به یک بار بیخ صبر بکند
Баҳор васл надонам ки кӣ ба бор ояд
بهار وصل ندانم که کی به بار آید
Дило агар чаҳ ки талхаст бехи сабр вале
دلا اگر چه که تلخست بیخ صبر ولی
Чу бар умед висоласт хушгувор ояд
چو بر امید وصالست خوشگوار آید
Пас аз таҳаммули сахтии умед васл марост
پس از تحمل سختی امید وصل مراست
Ки субҳ аз шабу тирёки ҳам з мор ояд
که صبح از شب و تریاک هم ز مار آید
зи чархи арбадаи ҷӯи баси хаданги тири ҷафо
ز چرخ عربده جو بس خدنگ تیر جفا
Биҷуст ва дар дили мардон ҳӯшёр ояд
بجست و در دل مردان هوشیار آید
Чу умри хуши нафасигар гузар кунӣ бар ман
چو عمر خوش نفسی گر گذر کنی بر من
Марои ҳамон нафас аз умр дар шумор ояд
مرا همان نفس از عمر در شمار آید
Биҷузи ғуломии дилдори хеши саъдӣ ро
بجز غلامی دلدار خویش سعدی را
зи кору бори ҷаҳонгар шҳист ор ояд
ز کار و بار جهان گر شهیست عار آید