Ба фалак мерасад аз рӯй чу хуршеди ту нур
به فلک میرسد از رویِ چو خورشید تو نور
Қул ҳўи аллоҳи аҳади чашми бад аз рӯй ту давр
«قل هو الله احد» چشمِ بد از روی تو دور
Одамӣ чун ту дар офоқ нишон натавон дод
آدمی چون تو در آفاق نشان نتوان داد
Балки дар ҷинат фирдавс набошад чу ту ҳур
بلکه در جنتِ فردوس نباشد چو تو حور
Ҳури фардо ки чунин рӯй биҳиштӣ бинад
حور، فردا که چنین روی بهشتی بیند
Гараш инсоф буд мӯътариф ояд ба қусӯр
گرش انصاف بود، معترف آید به قصور
Шаби мо рӯз набошад магари он гоҳ ки ту
شبِ ما، روز نباشد مگر آن گاه که تو
Аз шабистон ба даройӣ чу сабоҳ аз диҷўр
از شبستان به درآیی چو صباح از دیجور
Зиндагонро на аҷабгар ба ту майлӣ бошад
زندگان را نه عجب گر به تو میلی باشد
Мурдагони бозншиннд ба ишқати зи қубӯр
مردگان بازنشینند به عشقت ز قبور
Он бҳоем натавон гуфт ки ҷонӣ дорад
آن بهایم نتوان گفت که جانی دارد
Ки надорад назарӣ бо чу ту зибомнзўр
که ندارد نظری با چو تو زیبامنظور
Саҳари чашмони ту ботил накунад чашми овез
سحرِ چشمان تو باطل نکند چشمآویز
Масти чандон ки бакӯшанд набошад мастур
مست چندان که بکوشند نباشد مستور
Ин ҳаловат ки ту дорӣ на аҷаб каз дастат
این حلاوت که تو داری نه عجب کز دستت
Асалии дузаду зуннори бибандади занбӯр
عسلی دوزد و زنار ببندد زنبور
Он чаҳ дар ғайбатат эй дӯст ба ман ме гузарад
آن چه در غیبتت، ای دوست! به من میگذرد
Натавонам ки ҳикоят кунам ало ба ҳузур
نتوانم که حکایت کنم الا به حضور
Манам имрӯз ва ту ангушт намой зану мард
منم امروز و تو انگشتنمای زن و مرد
Ман ба ширини сухании ту ба никуии машҳур
من به شیرینسخنی، تو به نکویی مشهور
Сахтам ояд ки ба ҳар дидаи туро ме нигаранд
سختم آید که به هر دیده، تو را مینگرند
Саъдё ғайратат омад на аҷаби саъди ғаюр
سعدیا! غیرتت آمد نه عجب سعد غیور