Мо дар ин шаҳр ғарибем ва дар ин малики фақир
ما در این شهر غریبیم و در این مُلک فقیر
Ба каманди ту гирифтор ва ба доми ту асир
به کمندِ تو گرفتار و به دامِ تو اسیر
Дар офоқи кушодаи сети валикини бастаи сет
دَرِ آفاق گشادهست ولیکن بستهست
Аз сари зулфи ту дар пои дили мо занҷир
از سرِ زلفِ تو در پای دلِ ما زنجیر
Ман назар бозгрФтн натавонам ҳамаи умр
من نظر بازگرفتن نتوانم همه عمر
Аз ман эй хусрави хубони ту назари бозмгир
از من ای خسرو خوبان تو نظر بازمگیر
Гарчи дар хайли ту бисёр ба аз мо бошад
گرچه در خیل تو بسیار به از ما باشد
Мо туро дар ҳама олам нашносем назир
ما تو را در همه عالم نشناسیم نظیر
Дар дилам буд ки ҷон бар ту фишонам рӯзӣ
در دلم بود که جان بر تو فشانم روزی
Боз дар хотирам омад ки мтоъисти ҳақир
باز در خاطرم آمد که متاعیست حقیر
Ин ҳадис аз сари дрдист ки ман ме гӯям
این حدیث از سَرِ دردیست که من میگویم
То бар оташ нанаҳй буи наёяд зи абир
تا بر آتش ننهی بوی نیاید ز عبیر
Гар бигӯям ки марои ҳол парешоне нест
گر بگویم که مرا حال پریشانی نیست
Ранги рухсор хабар медиҳад аз сари замир
رنگِ رخسار خبر میدهد از سِرِ ضمیر
Ишқи перонаи сар аз ман аҷабат ме ояд
عشق پیرانه سر از من عجبت میآید
Чаҳ ҷавонии ту ки аз дасти ббрдии дили пер
چه جوانی تو که از دست ببردی دل پیر
Ман аз ин ҳар ду кмонхонаҳи абрӯии ту чашм
من از این هر دو کمانخانه ابروی تو چشم
Брнагирам вгрм чашм бидӯзанд ба тир
برنگیرم وگرم چشم بدوزند به تیر
Аҷаб аз ақли касоне ки маро панд диҳанд
عجب از عقل کسانی که مرا پند دهند
Бирав эй хоҷа ки ошиқ набӯд пандпазир
برو ای خواجه که عاشق نبود پندپذیر
Саъдёи пайкари матбӯъ барои назар аст
سعدیا پیکر مطبوع برای نظر است
Гар набинӣ чаҳ буд фоидаи чашми басир
گر نبینی چه بود فایده چشمِ بصیر