Мутаққаллиби даруни ҷомаи ноз
متقلب درون جامه ناز
Чаҳ хабар дорад аз шубони дароз
چه خبر دارد از شبان دراز
Оқили анҷом ишқ ме бинад
عاقل انجام عشق میبیند
То ҳам аввал намекунад оғоз
تا هم اول نمیکند آغاز
Ҷаҳд кардам ки дил ба кас надаҳум
جهد کردم که دل به کس ندهم
Чаҳ тавон кард бо ду дидаи боз
چه توان کرد با دو دیده باز
Зинҳор аз балои тири назар
زینهار از بلای تیر نظر
Ки чу рафт аз камон наёяд боз
که چو رفت از کمان نیاید باز
Магар аз шухии тзрўон буд
مگر از شوخی تذروان بود
Ки Фрўдўхтнди дидаи боз
که فرودوختند دیده باز
Мӯҳтасиб дар қафои рндонст
محتسب در قفای رندانست
Ғофил аз суфиёни шоҳдбоз
غافل از صوفیان شاهدباز
Порсое ки хамр ишқ чашид
پارسایی که خمر عشق چشید
Хонаи гӯ бо муоширони пардоз
خانه گو با معاشران پرداز
Ҳар киро бо гули ошноӣ буд
هر که را با گل آشنایی بود
Гӯ бирав бо ҷафоӣ хор бисоз
گو برو با جفای خار بساز
Сипарат май бибояд афкандан
سپرت میبباید افکندن
эй ки дил май диҳӣ ба тирандоз
ای که دل میدهی به تیرانداز
Ҳар чаҳ бинии з дӯстон карамаст
هر چه بینی ز دوستان کرمست
Гар иҳонат кунанд вагар эъзоз
گر اهانت کنند و گر اعزاز
Дасти маҷнӯну домани Лайлӣ
دست مجنون و دامن لیلی
Рӯй Маҳмӯду хоки пои Аёз
روی محمود و خاک پای ایاز
Ҳеҷ булбул надонад ин дастон
هیچ بلبل نداند این دستان
Ҳеҷ мутриб надорад ин овоз
هیچ مطرب ندارد این آواز
Ҳар матоъии зи маъдании хезад
هر متاعی ز معدنی خیزد
Шукр аз Мисру саъдӣ аз Широз
شکر از مصر و سعدی از شیراز