Муборактар шабу хуррамтарин рӯз
مبارکتر شب و خرمترین روز
Ба истиқболам омад бахти пирӯз
به استقبالم آمد بخت پیروز
Дуҳули зани гӯи ду навбати зани бишорат
دهلزن گو دو نوبت زن بشارت
Ки дӯшами қадар буд , имрӯзи наврӯз
که دوشم قدر بود، امروز نوروز
Мааст ин ё малик ё одамии зод
مه است این؟ یا ملک؟ یا آدمیزاد؟
Парӣ ё офтоби олами афрӯз
پری؟ یا آفتابِ عالمافروز؟
Надонистӣ ки зидон дар камӣнанд
ندانستی که ضدان در کمینند
Накӯ кардӣ алии рағми бдомўз
نکو کردی علیرغم بدآموز
Маро бо дӯст эй душман висол аст
مرا با دوست ای دشمن وصال است
Турогар дил нахоҳад дидаи брдўз
تو را گر دل نخواهد؛ دیده بردوز
Шубон донам ки аз дарди ҷудоӣ
شبان دانم که از درد جدایی
Ниосўдми зи фарёди ҷаҳони сӯз
نیاسودم ز فریادِ جهانسوز
Гар он шабҳои бо ваҳшат наме буд
گر آن شبهای با وحشت نمیبود
намедонист саъдии қадари ин рӯз
نمیدانست سعدی قدر این روز