Гардан афроштаам бар фалак аз толеъи хеш
گردن افراشتهام بر فلک از طالع خویش
Кин манам бо ту гирифтаи раҳи саҳро дар пеш
کاین منم با تو گرفته ره صحرا در پیش
Умрҳо бӯдаам андари талабати чораи кунон
عمرها بودهام اندر طلبت چارهکنان
Сол ҳо гаштаам аз дасти ту дастони андеш
سالها گشتهام از دست تو دستاناندیش
Поем имрӯз фурӯрафт ба ганҷинаи ком
پایم امروز فرورفت به گنجینه کام
Комами имрӯзи баромад ба муроди дили хеш
کامم امروز برآمد به مراد دل خویش
Чун муяссар шудӣ эй дар зи дарёи бартар
چون مُیَسّر شدی ای دُرِّ ز دریا برتر
Чун ба даст омадӣ эй луқма аз ҳавсила беш
چون به دست آمدی ای لقمهٔ از حوصله بیش
Афсари хоқон ваон гоҳи сар хок олуд
افسر خاقان وان گاه سر خاکآلود
Хаймаи султон ваон гоҳи фазои дарвеш
خیمه سلطان وان گاه فضای درویش
Саъдӣ ар нӯши висол ту биёбад чаҳ аҷаб
سعدی ار نوش وصال تو بیابد چه عجب
Солҳо хӯрдаи зи занбӯри суханҳои ту неш
سالها خورده ز زنبور سخنهای تو نیش