Ба умр хеш надидам шабӣ ки мурғи дилам
به عمر خویش ندیدم شبی که مرغ دلم
Нахонд бар гули рӯят чаҳ ҷои булбули боғ
نخواند بر گل رویت چه جای بلبل باغ
Туро фароғати могар буд ва гар набӯд
تو را فراغت ما گر بود و گر نبود
Маро ба рӯй ту аз ҳар ки оламаст фироқ
مرا به روی تو از هر که عالمست فراغ
зи дарди ишқи ту умед растгорӣ нест
ز درد عشق تو امید رستگاری نیست
Гурехтан натавонанд бандагон ба доғ
گریختن نتوانند بندگان به داغ
Туро ки ин ҳама булбул навой ишқ зананд
تو را که این همه بلبل نوای عشق زنند
Чаҳ илтифот буд бар адои мункири зоғ
چه التفات بود بر ادای منکر زاغ؟
Далел рӯй ту ҳам рӯй туаст саъдӣ ро
دلیل روی تو هم روی توست سعدی را
Чароғро натавон дид ҷуз ба нури чароғ
چراغ را نتوان دید جز به نور چراغ