Нишаста будаму хотир ба хештани машғӯл
نشسته بودم و خاطر به خویشتن مشغول
Дар сарой ба ҳам карда аз хурӯҷу духул
در سرای به همکرده از خُروج و دُخول
Шаби дарози ду чашмам бар остони умед
شب دراز، دو چشمم بر آستانِ امید
Ки бомдод дар ҳуҷра мезанад мأмўл
که بامداد، در حجره میزند مَأمول
Хумор дар сару дасташ ба хӯни ҳушёрон
خمار در سر و دستش به خون هشیاران
Хзибу наргиси масташ ба ҷодуӣ , мкҳўл
خضیب و نرگس مستش به جادویی، مَکحول
Биор соқӣу ҳамсояи гӯи ду чашм бабанд
بیار ساقی و همسایه گو دو چشم ببند
Ки ман ду гӯши бёкндм аз ҳадиси ъзўл
که من دو گوش بیاکندم از حدیث عَذول
Чунон тасаввури маъшӯқ дар хаёл ман аст
چنان تصور معشوق در خیال من است
Ки дигарам мутасаввир намешавад маъқӯл
که دیگرم متصور نمیشود مَعقول
Ҳадиси ақл дар айёми подшоҳии ишқ
حدیث عقل در ایّام پادشاهیِ عشق
Чунон шудаи сет ки фармони омили маъзул
چنان شدهست که فرمانِ عاملِ مَعزول
Шикоят аз ту надорам ки шукр бояд кард
شکایت از تو ندارم که شُکر باید کرد
Гирифтаи хонаи дарвеши Подшаҳ ба нузул
گرفته خانهٔ درویش، پادشه به نُزول
Бар он смот ки манзур , мизбон бошад
بر آن سِماط که منظور، میزبان باشد
Шикам параст кунад илтифот бар мأкўл
شکمپرست کند التفات بر مَأکول
Ба дӯстӣ ки зи дасти ту зарбати шамшер
به دوستی که ز دست تو ضربت شمشیر
Чунон мувофиқ табъ оядам ки зарби усӯл
چنان موافق طبع آیدم که ضرب اُصول
Маро ба ошиқӣу дӯстро ба маъшӯқӣ
مرا به عاشقی و دوست را به معشوقی
Чаҳ нисбатаст ? бигӯед қотилу мақтӯл
چه نسبت است؟ بگویید قاتل و مقتول
Маро ба гӯши ту бояд ҳикоят аз лаби хеш
مرا به گوش تو باید حکایت از لب خویش
Дареғ бошад пайғоми мо ба дасти расӯл
دریغ باشد پیغام ما به دست رسول
Даруни хотири саъдии маҷоли ғайр ту нест
درون خاطر سعدی مَجال غیر تو نیست
Чу хуш буд ба ту аз ҳар ки дар ҷаҳони машғӯл
چو خوش بوَد به تو از هر که در جهان مشغول