Гӯ халқ бидонанд ки ман ошиқу мастам
گو خلق بدانند که من عاشق و مستم
Овоза дурустаст ки ман тавбаи шикастам
آوازه درست است که من توبه شکستم
Гар душманам аизо кунаду дӯсти маломат
گر دشمنم ایذا کند و دوست ملامت
Ман фориғам аз ҳар чаҳ бигӯянд ки ҳастам
من فارغم از هر چه بگویند که هستم
эй нафас ки матлӯби ту номӯсу риё буд
ای نفس که مطلوب تو ناموس و ریا بود
Аз банд ту бархестам ва хуш бинишастам
از بند تو برخاستم و خوش بنشستم
Аз рӯй нигорин ту безорам агар ман
از روی نگارین تو بیزارم اگر من
То рӯй ту дидам ба дигар каси нгрстм
تا روی تو دیدم به دگر کس نگرستم
Зини пеши бромихтмӣ бо ҳамаи мардум
زین پیش برآمیختمی با همه مردم
То ёр бидидам дар ағёр бибастам
تا یار بدیدم در اغیار ببستم
эй соқӣ аз он пеш ки мастам кунӣ аз май
ای ساقی از آن پیش که مستم کنی از می
Ман худ зи назар дар қаду болои ту мастам
من خود ز نظر در قد و بالای تو مستم
Шаб ҳо гузарад бар ман аз андешаи рӯят
شبها گذرد بر من از اندیشه رویت
То рӯз на ман хуфта на ҳамсояи зи дастам
تا روز نه من خفته نه همسایه ز دستم
Ҳайфаст сухани гуфтан бо ҳар кас аз он лаб
حیف است سخن گفتن با هر کس از آن لب
Дашном ба ман даҳ ки дурудат бифиристам
دشنام به من ده که درودت بفرستم
Дерӣаст ки саъдӣ ба дил аз ишқ ту ме гуфт
دیریست که سعدی به دل از عشق تو میگفت
Ин бут на аҷаб бошад агар ман бпрстм
این بت نه عجب باشد اگر من بپرستم
Банди ҳамаи ғамҳои ҷаҳон бар дили ман буд
بند همه غمهای جهان بر دل من بود
Дар банди ту афтодам ва аз ҷумлаи брстм
در بند تو افتادم و از جمله برستم