Ман худ эй соқӣ аз ин шавқ ки дорам мастам
من خود ای ساقی! از این شوق که دارم، مستم
Ту ба як ҷуръаи дигари бабрӣ аз дастам
تو به یک جرعهٔ دیگر ببری از دستم
Ҳар чаҳ кӯтаҳи нзроннд бар эшон паймоӣ
هر چه کوتهنظرانند بر ایشان پیمای
Ки ҳарифони зи мл ва ман зи таъаммули мастам
که حریفان ز مل و من ز تأمل مستم
Ба ҳақи меҳру вафое ки миёни ман ва туаст
به حقِ مِهر و وفایی که میان من و توست
Ки на меҳр аз ту буридам на ба каси пайвастам
که نه مِهر از تو بریدم نه به کس پیوستم
Пеш аз обу гули ман дар дили ман меҳри ту буд
پیش از آب و گِل من، در دل من، مهر تو بود
Бо худ оварадам аз он ҷо на ба худ барбастам
با خود آوردم از آن جا، نه به خود بربستم
Ман ғуломи туам аз рӯй ҳақиқати лекин
من غلام توام از روی حقیقت لیکن
Бо вуҷӯдат натавон гуфт ки ман худ ҳастам
با وجودت نتوان گفت که من خود هستم
Доимои одати ман гӯшаи нишастан будӣ
دائما عادت من گوشه نشستن بودی
То ту бархестае аз талабати нншстм
تا تو برخاستهای از طلبت ننشستم
Ту малулӣу марои тоқат танҳоӣ нест
تو ملولی و مرا طاقت تنهایی نیست
Ту ҷафо кардӣ ва ман аҳд вафо нишкастам
تو جفا کردی و من عهد وفا نشکستم
Саъдё бо ту нагуфтам ки Марв дар паии дил
سعدیا با تو نگفتم که مرو در پی دل
Нарӯм бозгар ин бор ки рафтам ҷустам
نروم باز گر این بار که رفتم جستم