Ҳазор аҳди бкрдм ки гирд ишқ нигарадам
هزار عهد بکردم که گِرد عشق نگردم
Ҳаме баробарам ояд хаёл рӯй ту ҳар дам
همی برابرم آید خیال روی تو هر دم
Нахостам ки бигӯям ҳадиси ишқ ва чаҳ ҳоҷат
نخواستم که بگویم حدیث عشق و چه حاجت
Ки оби дида сурхам бигуфту чеҳраи зардам
که آب دیدهٔ سرخم بگفت و چهرهٔ زردم
Ба гулбунии брсидми маҷол сабр надидам
به گلبنی برسیدم، مجال صبر ندیدم
Гулӣ тамом начедам ҳазор хор бихӯрадам
گلی تمام نچیدم، هزار خار بخوردم
Бисоти умри марои гӯи Фрўнўрди замона
بساط عمر مرا گو فرونورد زمانه
Ки ман ҳикояти дидори дӯсти дрннўрдм
که من حکایت دیدار دوست درننوردم
Ҳар он касам ки насиҳат ҳаме кунад ба сабурӣ
هر آن کسم که نصیحت همی کند به صبوری
Ба ҳарзаи боди ҳаво май дамад бар оҳани сардам
به هرزه باد هوا میدمد بر آهن سردم
Ба чашмҳои ту донам ки то з чашм бирафтӣ
به چشمهای تو دانم که تا ز چشم برفتی
Ба чашми ишқу иродати назар ба ҳеҷ накардам
به چشم عشق و ارادت، نظر به هیچ نکردم
На рӯз мебашмурдам дар интизори ҷамолат
نه روز میبشمردم در انتظار جمالت
Ки рӯзи ҳиҷри туро худ з умр ме нашимурдам
که روز هجر تو را خود، ز عمر مینشمردم
Чаҳ душманӣ ки накардӣ чунон ки хуй ту бошад
چه دشمنی که نکردی چنان که خوی تو باشد
Ба дӯстӣ ки шикоят ба ҳеҷ дӯсти набардам
به دوستی که شکایت، به هیچ دوست نبردم
Ман аз каманди ту аввал чу ваҳш май брмидм
من از کمند تو اول، چو وحش میبرمیدم
Кунун ки инс гирифтам ба теғ бознагардам
کنون که انس گرفتم به تیغ بازنگردم
Туро ки гуфт ки саъдӣ на марди ишқ ту бошад
تو را که گفت که «سعدی، نه مردِ عشقِ تو باشد»؟
Гар аз вафот бигардам дуруст шуд ки на мардум
گر از وفات بگردم، درست شد که نه مَردم