Омадӣ ваа ки чаҳ муштоқ ва парешон будам
آمدی وه که چه مشتاق و پریشان بودم
То бирафтӣ з барам сӯрат беҷон будам
تا برفتی ز برم صورت بیجان بودم
На фаромӯшем аз зикри ту хомӯши нишонд
نه فراموشیم از ذکر تو خاموش نشاند
Ки дар андешаи авсофи ту ҳайрон будам
که در اندیشه اوصاف تو حیران بودم
Бе ту дар домани гулзори нхФтми як шаб
بی تو در دامن گلزار نخفتم یک شب
Ки на дар бодияи хор муғелон будам
که نه در بادیه خار مغیلان بودم
Зинда мекард марои дам ба дами умеди висол
زنده میکرد مرا دم به دم امید وصال
Вар на давр аз ?назарети кушта ҳиҷрон будам
ور نه دور از نظرت کشته هجران بودم
Ба таваллои ту дар оташи меҳнат чу халил
به تولای تو در آتش محنت چو خلیل
Гўиё дар чамани лола ва райҳон будам
گوییا در چمن لاله و ریحان بودم
То магари як нафасами буии ту оради дами субҳ
تا مگر یک نفسم بوی تو آرد دم صبح
Ҳамаи шаби мунтазири мурғ сҳрхўон будам
همه شب منتظر مرغ سحرخوان بودم
Саъдӣ аз ҷаври фироқати ҳамаи рӯз ин ме гуфт
سعدی از جور فراقت همه روز این میگفت
Аҳд бишикастӣ ва ман бар сар паймон будам
عهد بشکستی و من بر سر پیمان بودم