Ман он неам ки дил аз меҳр дӯст бурдорам
من آن نیام که دل از مهرِ دوست بردارم
Вагар зи кӣнаи душман ба ҷон расад корам
و گر ز کینهٔ دشمن به جان رسد کارم
На рӯй рафтанам аз хоки остонаи дӯст
نه رویِ رفتنم از خاکِ آستانهٔ دوست
На эҳтимоли нишастан на пои рафторам
نه احتمالِ نشستن نه پایِ رفتارم
Куҷои рӯм ? ки дилами пои банди меҳр касе сет
کجا روم؟ که دلم پایبندِ مهرِ کسیست
Сафар кунед рафиқон ки ман гирифторам
سفر کنید رفیقان که من گرفتارم
На ӯ ба чашми иродати назар ба ҷониби мо
نه او به چشمِ ارادت نظر به جانبِ ما
намекунад ; ки ман аз заъф , нопдидорм
نمیکند؛ که من از ضعف، ناپدیدارم
Агар ҳазор тънт кунӣу таънаи занӣ
اگر هزار تَعَنُّت کنی و طعنه زنی
Ман ин тариқи муҳаббати з даст нагузорам
من این طریقِ محبت ز دست نگذارم
Маро ба манзари хубон агар набошад майл
مرا به منظرِ خوبان اگر نباشد میل
Дуруст шуд ба ҳақиқат ки нақши деворам
درست شد به حقیقت که نقشِ دیوارم
Дар он қазия ки бо мо ба сулҳ бошад дӯст
در آن قضیه که با ما به صلح باشد دوست
Агар ҷаҳони ҳама душман шавад чаҳ ғам дорам ?
اگر جهان همه دشمن شود چه غم دارم؟
Ба ишқ рӯй ту иқрор мекунад саъдӣ
به عشقِ رویِ تو اقرار میکند سعدی
Ҳамаи ҷаҳон ба дар оянд гӯ ба инкорам
همه جهان به در آیند گو به انکارم
Куҷои тўонмти инкори дӯстӣ кардан ?
کجا توانمت انکارِ دوستی کردن؟
Ки оби дида гувоҳӣ диҳад ба иқрорам
که آبِ دیده گواهی دهد به اقرارم