Хуррами он рӯз ки чун гул ба чамани бозоиӣ
خرم آن روز که چون گل به چمن بازآیی
ё ба бустон ба дар ҳуҷраи ман бозоиӣ
یا به بُستان به درِ حجرهٔ من بازآیی
Гулбуни айши ман он рӯз шукуфтан гирад
گلبُنِ عیشِ من آن روز شکفتن گیرد
Ки ту чун сарви хиромон ба чамани бозоиӣ
که تو چون سروِ خرامان به چمن بازآیی
Шамъи ман рӯз наомад ки шабами бФрўзӣ
شمعِ من، روز نیامد، که شبم بفروزی؟
Ҷони ман вақт наомад ки ба тани бозоиӣ
جانِ من، وقت نیامد که به تن بازآیی؟
Об талхаст мудомам чу суроҳе дар ҳалқ
آب تلخ است مدامم چو صراحی در حلق
То ту як рӯз чу соғар ба даҳани бозоиӣ
تا تو یک روز چو ساغر به دهن بازآیی
Кӣ ба дидори ман эй мҳргсл бархезӣ
کی به دیدار من، ای مهرگسل! برخیزی؟
Кӣ ба гуфтори ман эй ъҳдшкни бозоиӣ
کی به گفتار من، ای عهدشکن! بازآیی؟
Мурғи сайри омадае аз қафаси суҳбат ва ман
مرغِ سیرآمدهای از قفسِ صحبت و من
Доми зории бунаами бӯ ки ба ман бозоиӣ
دامِ زاری بِنَهَم بو که به من بازآیی
Ман худ он бахт надорам ки ба ту пайвандам
من خود آن بخت ندارم که به تو پیوندم
На ту он лутфи надорӣ ки ба ман бозоиӣ
نه تو آن لطف نداری که به من بازآیی
Саъдии он дев набошад ки ба афсун баравад
سعدی آن دیو نباشد که به افسون برود
Ҳеҷат уфтад ки чу мардум ба сухани бозоиӣ
هیچت افتد که چو مردم به سخن بازآیی