Ман аз ту рӯй напечам гарми бёзорӣ
من از تو روی نپیچم گرم بیازاری
Ки хуш буд зи азизони таҳаммули хорӣ
که خوش بود ز عزیزان، تحمل خواری
Ба ҳар силаҳ ки хӯн маро бихоҳӣ рехт
به هر سلاح که خون مرا بخواهی ریخت
Ҳалол кардамат ало ба теғи безорӣ
حلال کردمت الا به تیغ بیزاری
Ту дар дили ман аз он хўштрӣу ширин тар
تو در دل من از آن خوشتری و شیرینتر
Ки ман турш биншинам зи талхи гуфторӣ
که من ترش بنشینم ز تلخ گفتاری
Агар дуоати иродат буд вагар дашном
اگر دعات ارادت بود و گر دشنام
Бигӯӣ аз он лаби ширин ки шаҳд май борӣ
بگوی از آن لب شیرین که شهد میباری
Агар ба сайд рӯй ваҳшӣ аз ту нгризд
اگر به صید رَوی وحشی از تو نگریزد
Ки дар каманди ту роҳат буд гирифторӣ
که در کمند تو راحت بود گرفتاری
Ба интизори иёдат ки дӯст ме ояд
به انتظار عیادت که دوست میآید
Хушаст бар дили ранҷури ишқ , беморӣ
خوش است بر دلِ رنجورِ عشق، بیماری
Гарми ту заҳри диҳӣ чун асали бёшомм
گرم تو زهر دهی چون عسل بیاشامم
Ба шарти он ки ба даст рақиб насипорӣ
به شرط آن که به دست رقیب نسپاری
Ту май рӯйу марои чашму дил ба ҷониб туаст
تو میروی و مرا چشم و دل به جانب توست
Вале чаҳ суд ки ҷониби нигаҳ наме дорӣ
ولی چه سود؟ که جانب نگه نمیداری
?герат чу ман ғами ишқии замонаи пеши орад
گرت چو من غم عشقی زمانه پیش آرد
Дигар ғами ҳамаи олам ба ҳеҷ нишморӣ
دگر غم همه عالم به هیچ نشماری
Дарознои шаб аз чашм дардмандон пресс
درازنای شب از چشم دردمندان پرس
Ки ҳар чаҳ пеши ту саҳласт саҳли пиндорӣ
که هر چه پیش تو سهل است سهل پنداری
Ҳикояти ману маҷнӯн ба икдгр монад
حکایت من و مجنون به یکدگر ماند
Наёфтем ва бамурдем дар талабкорӣ
نیافتیم و بمردیم در طلبکاری
Бинол саъдӣ агар чора висолат нест
بنال سعدی اگر چاره وصالت نیست
Ки нест чораи бечорагон ба ҷузи зорӣ
که نیست چاره بیچارگان به جز زاری