Кас аз ин намак надорад ки ту эй ғуломи дорӣ
کس از این نمک ندارد، که تو ای غلام داری
Дили риши ошиқонро намакии тамоми дорӣ
دل ریشِ عاشقان را نمکی تمام داری
На ман аўФтодаҳ танҳо ба каманди орзӯят
نه من اوفتاده تنها، به کمند آرزویت
Ҳамаи каси сар ту дорад ту сари кадоми дорӣ
همه کس سر تو دارد، تو سر کدام داری؟
Маликои мҳо нигорои снмои бетаи бҳоро
ملکا! مها! نگارا! صنما! بتا! بهارا!
Мутаҳайирам надонам ки ту худ чаҳ номи дорӣ
متحیرم، ندانم، که تو خود چه نام داری؟
Назарӣ ба лашкарӣ кун ки ҳазор хӯн бирезӣ
نظری به لشکری کن، که هزار خون بریزی
Ба хилофи теғи ҳиндӣ ки ту дар ниёами дорӣ
به خلاف تیغ هندی، که تو در نیام داری
Сифат рухом дорад тани нарми нозанинат
صفت رخام دارد، تن نرم نازنینت
Дили сахт низ бо ӯ на кам аз рухоми дорӣ
دلِ سخت نیز با او، نه کم از رخام داری
Ҳамаи дидаҳо ба сӯяти нигарони ҳасани рӯят
همه دیدهها به سویت، نگران حُسنِ رویت
Миннати он каминаи мурғам ки асири доми дорӣ
مَنَت آن کمینه مرغم، که اسیر دام داری
Чаҳ мухолифат бидидӣ ки мхолтт буридӣ
چه مخالفت بدیدی، که مخالطت بریدی؟
Магари он ки мо гадоӣам ва ту эҳтишоми дорӣ
مگر آن که ما گداییم و تو احتشام داری
Ба ҷузи ин гунаҳ надонам ки муҳибу меҳрбонам
به جز این گنه ندانم، که محب و مهربانم
Ба чаҳ ҷурми дигар аз ман сари интиқоми дорӣ
به چه جرم دیگر از من سر انتقام داری؟
Гила аз ту ҳош ллаҳ накунанд ва худ набошад
گِله از تو حاش لله، نکنند و خود نباشد
Магар аз вафои аҳдӣ ки на бар давоми дорӣ
مگر از وفای عهدی، که نه بر دوام داری
Назар аз ту брнагирам ҳамаи умр то бимирам
نظر از تو برنگیرم، همه عمر تا بمیرم
Ки ту дар дилам нишастӣу сари мақоми дорӣ
که تو در دلم نشستی و سر مقام داری
Сухани латифи саъдӣ на сухан ки қанди мисрӣ
سخن لطیف سعدی، نه سخن که قند مصری
Хаҷаласт аз ин ҳаловат ки ту дар каломи дорӣ
خجل است از این حلاوت، که تو در کلام داری