Гар даруни сӯхтае бо ту براردи нафасӣ
گر درونسوختهای با تو برآرد نفسی
Чаҳ тафовут кунад андари шкрстони магасӣ
چه تفاوت کند اندر شکرستان مگسی؟
эй ки инсофи дил сӯхтагон ме надиҳӣ
ای که انصافِ دلِ سوختگان میندهی
Худ чунин рӯй набоист намӯдан ба касе
خود چنین روی نبایست نمودن به کسی
Рӯзии андари қидмати уфтам вагар сар баравад
روزی اندر قدمت افتم و گر سَر برود
Ба зи ман дар сари ин воқеаи рафтанди басӣ
به ز من، در سَر این واقعه رفتند بسی
Домани дӯст ба дунё натавон дод аз даст
دامن دوست به دنیا نتوان داد از دست
Ҳайф бошад ки диҳии домани гавҳар ба хасӣ
حیف باشد که دهی دامنِ گوهر به خسی
То ба имрӯзи маро дар сухани ин сӯз набӯд
تا به امروز مرا در سخن این سوز نبود
Ки гирифтор набудам ба каманди ҳавасӣ
که گرفتار نبودم به کمندِ هوسی
Чун суроидани булбул ки хуш ояд бар шох
چون سراییدن بلبل که خوش آید بر شاخ
Лекини он сӯз надорад ки буд дар қафасӣ
لیکن آن سوز ندارد که بود در قفسی
Саъдёгар зи дили оташ ба қалам дар наздӣ
سعدیا گر ز دل آتش به قلم در نزدی
Пас чаро дӯд ба сар меравадаш ҳар нафасӣ
پس چرا دود به سر میرودش هر نفسی؟