Шаби фироқ ки донад ки то саҳар чанд аст
شب فراق، که داند که تا سحر چندست؟
Магар касе ки ба зиндони ишқ дар банд аст
مگر کسی که به زندانِ عشق در بندست
Гирифтам аз ғами дили роҳи бӯстони гирам
گرفتم از غم دل راه بوستان گیرم
Кадоми сарв ба болои дӯст монандаст ?
کدام سرو به بالای دوست مانندست؟
Паёми ман ки расонад ба ёри мҳргсл
پیام من که رساند به یار مهرگسل؟
Ки бршкстӣ ва моро ҳануз пайванд аст
که برشکستی و ما را هنوز پیوندست
Қисм ба ҷони ту гуфтани тариқ иззат нест
قسم به جان تو گفتن طریق عزت نیست
Ба хоки пои ту ваон ҳам азим савганд аст
به خاک پای تو وآن هم عظیم سوگندست
Ки бо шикастани паймон ва баргирафтани дил
که با شکستنِ پیمان و برگرفتنِ دل
Ҳануз дида ба дидорат орзӯманд аст
هنوز دیده به دیدارت آرزومندست
Биё ки бар сари Кувайти бисоти чеҳраи мост
بیا که بر سر کویت بساط چهرهٔ ماست
Ба ҷои хок ки дар зери пояти афкандаи сет
به جای خاک که در زیر پایت افکندست
Хаёл рӯй ту бех умед биншонада сет
خیال روی تو بیخ امید بنشاندست
Балои ишқи ту бунёд сабр барканда сет
بلای عشق تو بنیاد صبر برکندست
Аҷаб дар он ки ту маҷмӯ вагар қиёс кунӣ
عجب در آن که تو مجموع و گر قیاس کنی
Ба зер ҳар хами мӯят дилӣ пароканд аст
به زیر هر خم مویت دلی پراکندست
Агар бараҳна набошӣ ки шахс бинмое
اگر برهنه نباشی که شخص بنمایی
Гумон баранд ки пероҳанати гул окнд аст
گمان برند که پیراهنت گلآکندست
зи дасти рафта на танҳо манам дар ин савдо
ز دست رفته نه تنها منم در این سودا
Чаҳ дастҳо ки зи дасти ту бар худованд аст
چه دستها که ز دست تو بر خداوندست
Фироқи ёр ки пеши ту коҳ баррагӣ нест
فراق یار که پیش تو کاه برگی نیست
Биё ва бар дили ман байн ки кӯҳ алванд аст
بیا و بر دل من بین که کوه الوندست
зи заъфи тоқат оҳам намонаду тарсами халқ
ز ضعف طاقت آهم نماند و ترسم خلق
Гумон баранд ки саъдии з дӯст хурсанд аст
گمان برند که سعدی ز دوست خرسندست