Сарви истода ба чу ту рафтор ме кунӣ
سروْ ایستاده بِهْ، چو تو رفتار میکنی
Тӯтӣ хамӯш ба чу ту гуфтор ме кунӣ
طوطی خموش به، چو تو گفتار میکنی
Каси дил ба ихтиёр ба меҳрат наме диҳад
کس دل به اختیار به مهرت نمیدهد
Домии ниҳодае ки гирифтор ме кунӣ
دامی نهادهای که گرفتار میکنی
Ту худ чаҳ фитнае ки ба чашмони тарки маст
تو خود چه فتنهای؟ که به چشمان ترک مست
Тороҷи ақли мардум ҳушёр ме кунӣ
تاراج عقل مردم هشیار میکنی
Аз дӯстӣ ки дораму ғайрат ки май барам
از دوستی که دارم و غیرت که میبرم
Хашм оядам ки чашм ба ағёр ме кунӣ
خشم آیدم که چشم به اغیار میکنی
Гуфтӣ назар хатост ту дил мебарӣ равост
گفتی نظر خطاست، تو دل میبری رواست؟
Худ карда ҷурму халқ гунаҳкор ме кунӣ
خود کرده جرم و خلق گنهکار میکنی
Ҳаргиз Фромшт нашавад дафтари хилоф
هرگز فرامشت نشود دفتر خلاف
Бо дӯстони чунин ки ту такрор ме кунӣ
با دوستان چنین که تو تکرار میکنی
Дастон ба хӯни тозаи бечорагони хизоб
دستانْ به خونِ تازهٔ بیچارگانْ خضاب
Ҳаргизи кас ин кунад ки ту айёр ме кунӣ
هرگز کس این کند که تو عیار میکنی؟
Бо душманони мувофиқ ва бо дӯстон ба хашм
با دشمنان موافق و با دوستان به خشم
Ёрӣ набошад ин ки ту бо ёр ме кунӣ
یاری نباشد این که تو با یار میکنی
То ман самоъ май шинавам панд нашнавам
تا من سماع میشنوم پند نشنوم
эй муддаии насиҳат бекор ме кунӣ
ای مدعی نصیحت بیکار میکنی
Гар теғ май зании сипар инак вуҷӯди ман
گر تیغ میزنی سپر اینک وجود من
Сулҳаст аз ин тараф ки ту пайкор ме кунӣ
صلح است از این طرف که تو پیکار میکنی
Аз рӯй дӯст то накунӣ рӯ ба офтоб
از روی دوست تا نکنی رو به آفتاب
Каз офтоб рӯй ба девор ме кунӣ
کز آفتاب روی به دیوار میکنی
Зинҳори саъдӣ аз дили сангини кофараш
زنهار سعدی از دل سنگین کافرش
Кофар чаҳ ғам хӯрд чу ту зинҳор ме кунӣ
کافر چه غم خورد؟ چو تو زنهار میکنی