Вақт он омад ки хуш бошад канори сабзаи ҷӯй
وقت آن آمد که خوش باشد کنار سبزه جوی
Гар сар саҳроат бошад срўболоиии биҷавӣ
گر سر صحرات باشد سروبالایی بجوی
Вар ба хилват бо длоромт муяссар ме шавад
ور به خلوت با دلارامت میسر میشود
Дар сирояти худ гул афшонаст сабзии гӯи Марвӣ
در سرایت خود گل افشان است سبزی گو مروی
эй насими кӯии маъшӯқи ин чаҳ бод хуррам аст
ای نسیم کوی معشوق این چه باد خرم است؟
То куҷо будӣ ки ҷонам тоза мегардад ба буи
تا کجا بودی که جانم تازه میگردد به بوی؟
Мутрибони гӯйӣ дар овозанду мисатон дар самоъ
مطربان گویی در آوازند و مستان در سماع
Шоҳидон дар ҳолату шӯридагон дарҳоиу ҳўӣ
شاهدان در حالت و شوریدگان در های و هوی
эй рафиқи онч аз балои ишқ бар ман ме равад
ای رفیق آنچ از بلای عشق بر من میرود
Гар ба тарки ман наме гӯйӣ ба тарк ман бигӯӣ
گر به تُرک من نمیگویی به تَرک من بگوی
эй ки пой рафтанат кунадасту роҳи васли тунд
ای که پای رفتنت کند است و راه وصل تند
Бозгаштан ҳам нишоед то қадами дории бпўӣ
بازگشتن هم نشاید تا قدم داری بپوی
Гар бибинӣ гиря зорам ндонӣ фарқ кард
گر ببینی گریهٔ زارم ندانی فرق کرد
Коб чашмаст ин ки пешат меравад ё оби ҷӯй
کآب چشم است این که پیشت میرود یا آب جوی
Гӯйро гуфтанд к-эии бечора саргардон мабош
گوی را گفتند کای بیچاره سرگردان مباش
Гӯии мискинро чаҳ товонаст чавгонро бигӯӣ
گوی مسکین را چه تاوان است چوگان را بگوی
эй ки гуфтӣ дил бишӯй аз меҳри ёри меҳрбон
ای که گفتی دل بشوی از مهر یار مهربان
Ман дил аз меҳраш намешавем ту даст аз ман бишӯй
من دل از مهرش نمیشویم تو دست از من بشوی
Саъдё ошиқ нишоед бӯдани андари хонақоҳ
سعدیا عاشق نشاید بودن اندر خانقاه
Шоҳиди бозии фароху зоҳидии танги хуй
شاهد بازی فراخ و زاهدانِ تنگخوی