Бар болини турбат , яҳё , пайғомбари алайҳи ассалом , мӯътакиф будам дар ҷомеъи димишқ ки яке аз мулӯки араб ки ба бе инсофии мансӯб буд иттифоқан ба зиёрат омаду намоз ва дуо карду ҳоҷати хост .
بر بالینِ تربتِ یحیی، پیغامبر -عَلَیْهِ السّلامُ- معتکف بودم در جامع دمشق که یکی از ملوکِ عرب که به بیانصافی منسوب بود، اتّفاقاً به زیارت آمد و نماز و دعا کرد و حاجت خواست.
Дарвешу ғании бандаи ин хок даранд
درویش و غنی بندهٔ این خاک درند
Ва онон ки ғанӣ таранд муҳтоҷ таранд
و آنان که غنیترند محتاجترند
Онгаҳ маро гуфт : аз он ҷо ки ҳиммат даравишонасту сидқи мъомлти эшон , хотирии ҳамроҳ ман кунед ки аз душмании саъб , андишнокм . Гуфтамаш : бар раияти заъиф раҳмат кун то аз душмани қавӣ заҳмат набинӣ .
آن گه مرا گفت: از آن جا که همّتِ درویشان است و صدقِ معاملت ایشان، خاطری همراه من کنید که از دشمنی صعب، اندیشناکم. گفتمش: بر رعیّتِ ضعیف رحمت کن تا از دشمنِ قوی زحمت نبینی.
Ба бозувони тавоноу қӯти сари даст
به بازوانِ توانا و قوّتِ سرِ دست
Хатост панҷаи мискин нотавон бишикаст
خطاست پنجهٔ مسکینِ ناتوان بشکست
Натарсад он ки бар афтодагони нбхшоид ?
نترسد آن که بر افتادگان نبخشاید؟
Кигар зи пой дар ояд касаш нагирад даст ?
که گر ز پای در آید کسش نگیرد دست؟
Ҳар он ки тухми бадии кишту чашм некӣ дошт
هر آن که تخمِ بدی کشت و چشمِ نیکی داشت
Димоғи биҳдаҳи пухту хаёли ботили баст
دِماغِ بیهده پخت و خیالِ باطل بست
зи гӯши пунбаи буруни ор ва дод халқ бидиҳ
ز گوش پنبه برون آر و دادِ خلق بده
Вагар ту менадиҳӣ дод , рӯз додӣ ҳаст !
وگر تو میندهی داد، روزِ دادی هست!
Банӣ одам аъзоӣ якдигаранд
بنی آدم اعضایِ یکدیگرند
Ки дар офариниши з як гавҳаранд
که در آفرینش ز یک گوهرند
Чу узвӣ ба дард оварад рӯзгор
چو عضوی به درد آورد روزگار
Дигар узвҳоро намонад қарор
دگر عضوها را نماند قرار
Ту каз меҳнати дигарон бе ғамӣ
تو کز محنتِ دیگران بیغمی
Нишоед ки науммат ниҳанд одамӣ
نشاید که نامت نهند آدمی