Якеро аз мутааллимони камоли баҳҷатӣ буду муаллим аз онҷо ки ҳис башариятаст бо ҳасани башара ӯ мъомлтӣ дошт ва вақте ки ба хилваташ дарёфтӣ гуфтӣ :
یکی را از متَعَلّمان کمالِ بَهجتی بود و معلّم از آن جا که حسِّ بشریّت است با حُسنِ بَشَرهٔ او معاملتی داشت و وقتی که به خلوتش دریافتی، گفتی:
На ончунон ба ту машғӯлам эй биҳиштӣ рӯй
نه آن چنان به تو مشغولم ای بهشتیروی
Ки ёди хештанам дар замир ме ояд
که یادِ خویشتنم در ضمیر میآید
з диданат натавонам ки дида дар бандам
ز دیدنت نتوانم که دیده دربندم
Вагар муқобилаи байнам ки тир ме ояд
و گر مقابله بینم که تیر میآید
Борӣ писар гуфт : он чунон ки дар одоби дарси ман назарӣ мефармое дар одоби нафасам низ таъаммули фармой то агар дар ахлоқи ман нописандии бинӣ ки марои он писанди ҳамеи намояд бар онам итилоъ фармое то ба табдили он саъй кунам .
باری پسر گفت: آن چنان که در آدابِ درس من نظری میفرمایی در آدابِ نفسم نیز تأمّل فرمای، تا اگر در اخلاقِ من ناپسندی بینی که مرا آن پسند همینماید، بر آنم اطْلاع فرمایی تا به تبدیلِ آن سعی کنم.
Гуфт : эй писар ! ин сухан аз дайгарӣ пресс ки он назар ки маро бо туаст ҷузи ҳунар наме байнам .
گفت: ای پسر! این سخن از دیگری پرس که آن نظر که مرا با توست، جز هنر نمیبینم.
Чашми бидонадяш ки барканда бод
چشمِ بداندیش که برکنده باد
Айби намояди ҳунараш дар назар
عیب نماید، هنرش در نظر
Вари ҳунарии дорӣ ва ҳафтод айб
ور هنری داری و هفتاد عیب
Дӯст набинад ба ҷузи он як ҳунар
دوست نبیند به جز آن یک هنر