Рӯзӣ ба ғурури ҷавонии сахт ронда будаму шабонгоҳ ба пои гриўаҳ эй сусти монда .
روزی به غرور جوانی سخت رانده بودم و شبانگاه به پای گریوهای سست مانده.
Пермардии заъиф аз пас корвон ҳаме омад ва гуфт : чаҳ нишинӣ ки на ҷой хуфтанаст ?
پیرمردی ضعیف از پس کاروان همیآمد و گفت: چه نشینی که نه جای خفتن است؟
Гуфтам : чун рӯм ки на пой рафтанаст ? !
گفتم: چون روم که نه پای رفتن است؟!
Гуфт : ин нишнидӣ ки соҳибдилон гуфтаанд : рафтану нишастан ба ки давидану гусастан .
گفت: این نشنیدی که صاحبدلان گفتهاند: رفتن و نشستن به که دویدن و گسستن.
эй ки муштоқи манзилии мштоб
ای که مشتاق منزلی مشتاب
Панди ман кори банд ва сабр омӯз
پند من کار بند و صبر آموز
Асби тозии ду таг равад ба шитоб
اسب تازی دو تگ رود به شتاب
Ва уштур оҳиста меравад шабу рӯз
و اشتر آهسته میرود شب و روز