Даҳони хазинаи гавҳар шудаи сету гӯши садаф
دهان خزینه گوهر شده ست و گوش صدف
Знзму насри ту эй хоҷаи эмоми аҷал
زنظم و نثر تو ای خواجه امام اجل
Гуҳи ривояти шеъри ту ровӣони ту ро
گه روایت شعر تو راویان تو را
Ҳамаи даҳони з гуҳар бошаду забони зи асал
همه دهان ز گهر باشد و زبان ز عسل
Гар осмони барин хўонмт раво бошад
گر آسمان برین خوانمت روا باشد
Ки ҳаст лафзи туро ртбт улувва Зуҳал
که هست لفظ تو را رتبت علو زحل
Ҷабали макони ҷавоҳир шудаи сету маъдани лаъл
جبل مکان جواهر شده ست و معدن لعل
Бидон сабаб ки ту нисбат кунӣ ҳаме ба ҷабал
بدان سبب که تو نسبت کنی همی به جبل
Дарахти илми туро аз бадоеъаст самар
درخت علم تو را از بدایع است ثمر
Замини фазли туро аз нўозл аст назул
زمین فضل تو را از نوازل است نزل
Шудаи сети назми ту бо роҳати вусӯли умед
شده ست نظم تو با راحت وصول امید
Шудаи сети насри ту бо лиззати ҳусӯли амл
شده ست نثر تو با لذت حصول امل
Таровати ғазали втрии таронаи ту
طراوت غزل وتری ترانه تو
Диҳад зи хоки набот ва кунад зи санги раҷул
دهد ز خاک نبات و کند ز سنگ رجل
Чу хоки хорам аз ин рӯзгори сангини дил
چو خاک خوارم از این روزگار سنگین دل
Ки хок вор надорам ба назд халқи маҳал
که خاک وار ندارم به نزد خلق محل
Агар чаҳ лафз ман омад айёри зари сухан
اگر چه لفظ من آمد عیار زر سخن
Аз ин ҷаҳони бадал зар шудам чу сими бадал
از این جهان بدل زر شدم چو سیم بدل
Аз он қабл ки мисл гаштаам ба назми бадеъ
از آن قبل که مثل گشته ام به نظم بدیع
Ҳаме зананд маро ҳар касе ба ҷой мисл
همی زنند مرا هر کسی به جای مثل
Ҳамеша чашми халали сӯии ҳол ман нигарад
همیشه چشم خلل سوی حال من نگرد
Гумон барам ки бадв ошиқ омадаст халал
گمان برم که بدو عاشق آمدست خلل
з некуӣаст ки дили ишқро қабул кунад
ز نیکویی است که دل عشق را قبول کند
Халали зи ошиқи ҳол ман омад аз чаҳ қабл
خلل ز عاشق حال من آمد از چه قبل
Бад-ӣни ҷаҳон ва чунин ошиқ ва чунин маъшӯқ
بدین جهان و چنین عاشق و چنین معشوق
Нигоҳи дори ту бодои худои ъзўҷл
نگاه دار تو بادا خدای عزوجل