Рӯй ман чин аз фироқи оннигор чин гирифт
روی من چین از فراق آن نگار چین گرفت
Айши ман талхии зи ишқи он лаб ширин гирифт
عیش من تلخی ز عشق آن لب شیرین گرفت
Ин дили ношоди ман зон зулф чун шамшод ӯ
این دل ناشاد من زان زلف چون شمشاد او
Он ҳаме гирад ки Фарҳод аз ғам ширин гирифт
آن همی گیرد که فرهاد از غم شیرین گرفت
Гар дар оташи ҳеҷ кас маскан нагирад пас чаро
گر در آتش هیچ کس مسکن نگیرد پس چرا
Меҳри маскан дар миёни ин дил мискин гирифт
مهر، مسکن در میان این دل مسکین گرفت
Бистару болини ман зобасту оташи пас маро
بستر و بالین من ز آب است و آتش پس مرا
Носголидаҳи фироқаш бар сар болин гирифт
ناسگالیده فراقش بر سر بالین گرفت
Ман ғуломи он руху боло ки гӯйии сарву моҳ
من غلام آن رخ و بالا که گویی سرو و ماه
Ростӣ зон кард ҳосили равшаноӣ зин гирифт
راستی زان کرد حاصل روشنایی زین گرفت
Ҳар ки ёд ӯ гирифт ва май ба рӯй ӯ чашид
هر که یاد او گرفت و می به روی او چشید
Шарбат кавсар чашиду ёр ҳўролъин гирифт
شربت کوثر چشید و یار حورالعین گرفت
Чун зи рухсору лабаш бар кӯҳ ва дашт афтод акс
چون ز رخسار و لبش بر کوه و دشت افتاد عکس
Ин ҳамаи биҷодаҳи гашт ва он ҳама насрин гирифт
این همه بیجاده گشت و آن همه نسرین گرفت
Гуфтам аз баҳри видоъаши офарин , гӯйии висол
گفتم از بهر وداعش آفرین، گویی وصال
Ҳар замонӣ бар фироқаши ҷони ман нафрин гирифт
هر زمانی بر فراقش جان من نفرین گرفت
Чун лаб лаълаш бидидам ҷазаъи ман парвин фишонд
چون لب لعلش بدیدم جزع من پروین فشاند
Бар ман аз бими рақибони лаъл дар парвин гирифт
بر من از بیم رقیبان لعل در پروین گرفت
Ҳар куҷои чашмами баромади нур буд аз рӯй ӯ
هر کجا چشمم برآمد نور بود از روی او
Рости гӯйии нур рӯй аз рой муҷаддадин гирифт
راست گویی نور روی از رای مجدالدین گرفت
Умдаи алисломи Абулқосими алӣ кандар улувва
عمدة الاسلام ابوالقاسم علی کاندر عُلُو
Ҳиммати ъолиши ҷой аз авҷ алӣин гирифт
همت عالیش جای از اوج علیین گرفت
Чанд беиқбол каз иқбол ӯ иқбол ёфт
چند بیاقبال کز اقبال او اقبال یافت
Чанд бетамкин ки аз тамкин ӯ тамкин гирифт
چند بیتمکین که از تمکین او تمکین گرفت