Субҳаст соқиои қадаҳи хушгувори бахш

صبح است ساقیا قدح خوشگوار بخش

Ҷомии чўоФтоб ба ин хоксори бахш

جامی چوآفتاب به این خاکسار بخش

Чун ток агар чаҳ пои адаби каҷ ниҳода ем

چون تاک اگر چه پای ادب کج نهاده ایم

Моро ба резиши мижаи ашкбори бахш

مارا به ریزش مژه اشکبار بخش

Даври нишоти нуқта ба паргор баста аст

دور نشاط نقطه به پرگار بسته است

Срчўни гарони шдоз май ваҳдат ба дори бахш

سرچون گران شداز می وحدت به دار بخش

Дастам агар знқди дили вдини тиҳӣ шуда аст

دستم اگر زنقد دل ودین تهی شده است

Кӯтоҳии маро ба сари зулфи ёри бахш

کوتاهی مرا به سر زلف یار بخش

Об ҳаёт мечакад аз миваи биҳишт

آب حیات می چکد از میوه بهشت

Ҷонро ба буии себи занхдони ёри бахш

جان را به بوی سیب زنخدان یار بخش

Дркўчаҳи боғи хулди хазонро гзорнист

درکوچه باغ خلد خزان را گذارنیست

Дилро ба он ду силсилаи мшкбори бахш

دل را به آن دو سلسله مشکبار بخش

Зон пештар ки хӯни ту ризқ аҷал шавад

زان پیشتر که خون تو رزق اجل شود

Ин ҷуръаро ба наргиси мхмўрёри бахш

این جرعه را به نرگس مخموریار بخش

эй офтоби рӯ ки чунин гарм май рӯй

ای آفتاب رو که چنین گرم می روی

Ташрифи пуртӯй ба ман хоксори бахш

تشریف پرتوی به من خاکسار بخش

Бурдор ҳаркии рака дилат мекашад , зи хок

بردار هرکه راکه دلت می کشد ،ز خاک

Моро ба хоки раҳгузори интизори бахш

مارا به خاک رهگذار انتظار بخش

эй он ки пои кӯҳ ба домани шикаста Эй

ای آن که پای کوه به دامن شکسته ای

Як зарраи сабри ҳам ба ман биқрори бахш

یک ذره صبر هم به من بیقرار بخش

Чун барқ , хушк магзар азин дашти оташин

چون برق، خشک مگذر ازین دشت آتشین

Обии зи ҷӯии обилаи дил ба хори бахш

آبی ز جوی آبله دل به خار بخش

Нуқсони нкрдхзри зсрчшмаҳи ҳаёт

نقصان نکردخضر زسرچشمه حیات

Ҷонро ба ҷабҳа арақ олуд ёри бахш

جان را به جبهه عرق آلود یار بخش

Май дар сари бараҳнаи Перуи боли вокнд

می در سر برهنه پرو بال واکند

Дастори хеши ро ба май хушгувори бахш

دستار خویش رابه می خوشگوار بخش

Дил нозукаст ( ва ) партави миннати гарони рикоб

دل نازک است (و)پرتو منت گران رکاب

Ойӣнаи ро баи талъати ойӣнаи дори бахш

آیینه رابه طلعت آیینه دار بخش

Ҳангома висол наярзад ба доғи рашк

هنگامه وصال نیرزد به داغ رشک

Пешонии кушодаи гулро ба хори бахш

پیشانی گشاده گل را به خار بخش

Ин он ғазал ки ҳофиз Широз гуфта аст

این آن غزل که حافظ شیراز گفته است

Зон баҳри қатрае ба ман хоксори бахш

زان بحر قطره ای به من خاکسار بخش