Дилдори мости маҳви хати машки фоми хеш
دلدار ماست محو خط مشکفام خویش
Сайёдро ки дида ки уфтад ба доми хеш
صیاد را که دیده که افتد به دام خویش
Кайфиятӣ ки ҳаст зи ҷавлони худ туро
کیفیتی که هست ز جولان خود ترا
Тоўси мастро набӯд аз хироми хеш
طاوس مست را نبود از خرام خویش
Зон пештар ки хат кунадаш пой дар рикоб
زان پیشتر که خط کندش پای در رکاب
Башикан хумори ман ба май лаъли фоми хеш
بشکن خمار من به می لعلفام خویش
Инсоф нест каз лаби ҳозири ҷавоби ту
انصاف نیست کز لب حاضر جواب تو
Хиҷлат буд вазифаи ман аз саломи хеш
خجلت بود وظیفه من از سلام خویش
Аз бас ки саркашаст дили бадгумони ту
از بس که سرکش است دل بدگمان تو
Натавон ба чашми пок туро кард роми хеш
نتوان به چشم پاک ترا کرد رام خویش
Дорад куҷои хабари зи сари пурхумори мо ?
دارد کجا خبر ز سر پرخمار ما؟
Онро ки аз лабаст май лаъли фоми хеш
آن را که از لب است می لعلفام خویش
Маро буд тамом шудани бутаи гудоз
مه را بود تمام شدن بوتهگداز
эй шӯхи пари мноз ба моҳи тамоми хеш
ای شوخ پر مناز به ماه تمام خویش
Дар перӣ аз ҳаёти зи бас сайр гашта ам
در پیری از حیات ز بس سیر گشتهام
Худ мекунам зи қомати хами ҳалқаи номи хеш
خود میکنم ز قامت خم حلقه نام خویش
Ғофил ки ман мекунадаш зи интиқоми ҳақ
غافل که من میکندش ز انتقام حق
Ҳаркас ки мекашад зи адуи интиқоми хеш
هرکس که میکشد ز عدو انتقام خویش
Об ҳаёт нест гуворои зи ҷоми халқ
آب حیات نیست گوارا ز جام خلق
Заҳр ҳалоҳиласт гуворои зи ҷоми хеш
زهر هلاهل است گوارا ز جام خویش
Будам ба ҷинат аз дил бе орзӯи муқӣм
بودم به جنت از دل بیآرزو مقیم
Дард ва захм фиканд таманнои хоми хеш
درد و زخم فکند تمنای خام خویش
Соиби маро ба нома барон нест эътимод
صائب مرا به نامهبران نیست اعتماد
Худ май барам ба хизмати ҷонони паёми хеш
خود میبرم به خدمت جانان پیام خویش