зи сайр боғ нагардад дили парешони ҷамъ
ز سیر باغ نگردد دل پریشان جمع
Ки хешро накунад об дар гулистони ҷамъ
که خویش را نکند آب در گلستان جمع
Мробаҳи ғунчаи дарин боғ рашк ме ояд
مرابه غنچه درین باغ رشک می آید
Ки баҳри пора шудан мекунад гиребони ҷамъ
که بهر پاره شدن می کند گریبان جمع
Каманди тӯли амл дркшокшаст мудом
کمند طول امل درکشاکش است مدام
зи сайд дил нашавад турраи парешони ҷамъ
ز صید دل نشود طره پریشان جمع
Ба равшанои фаҳм аз чароғи қонеъи шӯ
به روشنایی فهم از چراغ قانع شو
Ки ин дўшмъ нагардад ба як шабистони ҷамъ
که این دوشمع نگردد به یک شبستان جمع
Маро ки баҳри гуҳар азкнор ме гузарад
مرا که بحر گهر ازکنار می گذرد
Чаро кунам чу садафи оби чашми Нитсаон ҷамъ
چرا کنم چو صدف آب چشم نیسان جمع
Мҷуи баландӣ агар раҳмати орзӯи дорӣ
مجو بلندی اگر رحمت آرزو داری
Ки мешавад ба заминҳои пасти борони ҷамъ
که می شود به زمینهای پست باران جمع
Тамоми шаби з барои захираи фардо
تمام شب ز برای ذخیره فردا
Кунам зи кӯчаи вбозор , санги Тифлони ҷамъ
کنم ز کوچه وبازار ،سنگ طفلان جمع
Чу гули шкФт маҳоласт ғунча гардад боз
چو گل شکفت محال است غنچه گردد باز
Ба ҳеҷ ҳила нагардад дили парешони ҷамъ
به هیچ حیله نگردد دل پریشان جمع
зи мавҷи ҳодисаи мардон наме раванд аз ҷо
ز موج حادثه مردان نمی روند از جا
Ки зер теғ кунад кӯҳи побаи домони ҷамъ
که زیر تیغ کند کوه پابه دامان جمع
Куҷои зи сайри парешони мо хабари дорӣ ?
کجا ز سیر پریشان ما خبر داری ؟
Туро ки ҳаст дили оҳанӣни чўпикони ҷамъ
ترا که هست دل آهنین چوپیکان جمع
Балост доираи халқ чун васеъ афтод
بلاست دایره خلق چون وسیع افتاد
Ки дому дад ҳама бошанд дрбёбони ҷамъ
که دام و دد همه باشند دربیابان جمع
Ба офтоб ҷҳонтоб мерасад соиб
به آفتاب جهانتاب می رسد صائب
Чу шабнами он ки кунад дили дарин гулистони ҷамъ
چو شبنم آن که کند دل درین گلستان جمع