намекунад бутгар агар бути замони ҳосили зи санг
می کند بتگر اگر بت زمان حاصل ز سنگ
Ман бутӣ дорам ки ҳар дам май тарошади дили зи санг
من بتی دارم که هر دم می تراشد دل ز سنگ
Аз маҳак парво надорад нуқраи комили айёр
از محک پروا ندارد نقره کامل عیار
Сар напечад ҳар ки дар савдо шавад комили зи санг
سر نپیچد هر که در سودا شود کامل ز سنگ
Лолаи кӯҳами шароби ман зи ҷӯш ғайрат аст
لاله کوهم شراب من ز جوش غیرت است
намекунам зангӣ ба сад хӯнами ҷигари ҳосили зи санг
می کنم زنگی به صد خونم جگر حاصل ز سنگ
Ҳамчунон аз шӯхи чашмӣ бар сари бозорҳост
همچنان از شوخ چشمی بر سر بازارهاست
Роз ӯро чун шарари созам агар маҳмили зи санг
راز او را چون شرر سازم اگر محمل ز سنگ
Дар ҷунун аз санги Тифлони шикваи кофар неъматӣ аст
در جنون از سنگ طفلان شکوه کافر نعمتی است
Кард хўонсолори қисмати нақли ин маҳфили зи санг
کرد خوانسالار قسمت نقل این محفل ز سنگ
То мабодо аз туҳидастии зи ман ғофил шаванд
تا مبادا از تهیدستی ز من غافل شوند
намекунам пари домани атфолро ғофили зи санг
می کنم پر دامن اطفال را غافل ز سنگ
Содаи лавҳии байн ки дорад шишаи хўнгрми мо
ساده لوحی بین که دارد شیشه خونگرم ما
Бо камоли душмании умед рӯй дили зи санг
با کمال دشمنی امید روی دل ز سنگ
Оқилони зи андешаи рӯзии дил худ ме хуранд
عاقلان ز اندیشه روزی دل خود می خورند
Барги айши кӯча гардон мешавад ҳосили зи санг
برگ عیش کوچه گردان می شود حاصل ز سنگ
Зоҳиди афсурдаро ратли гарон одам накард
زاهد افسرده را رطل گران آدم نکرد
Теғ чу байн кӣ бариданро шавад қобили зи санг
تیغ چو بین کی بریدن را شود قابل ز سنگ
Чун нагиранд аз ҳавои санги ошиқон
چون نگیرند از هوا سنگ عاشقان
Рӯи сифедии донаҳоро мешавад ҳосили зи санг
رو سفیدی دانه ها را میشود حاصل ز سنگ
Дар гузар аз бесутун чун барқ эй ширин мабод
در گذر از بیستون چون برق ای شیرین مباد
Сар занад чун лолаи хунини панҷае ғофили зи санг
سر زند چون لاله خونین پنجه ای غافل ز سنگ
Тан прессатон зери девор аз гаронӣ монда анд
تن پرستان زیر دیوار از گرانی مانده اند
Варна меояд шарари берун ба буии дили зи санг
ورنه می آید شرر بیرون به بوی دل ز سنگ
Шоми ғифлатгар чунин афсона пардозӣ кунад
شام غفلت گر چنین افسانه پردازی کند
Пой хоб олуд меояд буруни мушкили зи санг
پای خواب آلود می آید برون مشکل ز سنگ
Ин ҷавоби он ғазали соиб ки мирблх гуфт
این جواب آن غزل صائب که میربلخ گفت
Нестам ғофил ки дорад дилбари ман дили зи санг
نیستم غافل که دارد دلبر من دل ز سنگ