Нест имрӯзӣ чу шабнами ишқи ман борӯй гул
نیست امروزی چو شبنم عشق من باروی گل
Дар ҳарими байзаи хилвати доштам бо буии гул
در حریم بیضه خلوت داشتم با بوی گل
Оби чашми булбулони ойӣна дорӣ ме кунад
آب چشم بلبلان آیینه داری می کند
Май наад шабнами абаси ойӣна бар зонуии гул
می نهد شبنم عبث آیینه بر زانوی گل
Дар гулистонӣ ки рухсор ту гардад бе ниқоб
در گلستانی که رخسار تو گردد بی نقاب
Ранги натавонад гирифтани хешро бар рӯй гул
رنگ نتواند گرفتن خویش را بر روی گل
Ишқ дар мастии Аннан шарм медорад нигоҳ
عشق در مستی عنان شرم می دارد نگاه
Нола булбул напечад аз адаб бо буии гул
ناله بلبل نپیچد از ادب با بوی گل
Булбулон чун сари зи зери бол берун оваранд
بلبلان چون سر ز زیر بال بیرون آورند
Дар гулистон ки бошад хори ҳмзонўии гул
در گلستان که باشد خار همزانوی گل
Фориғам аз давр бош хору манъи боғбон
فارغم از دور باش خار و منع باغبان
Ман ки аз гули қонеъами соиб ба гуфту гӯии гул
من که از گل قانعم صائب به گفت و گوی گل