Ман ки ҳрпораҳ дилам ҳаст ба сад ҷои машғӯл

من که هرپاره دلم هست به صد جا مشغول

Бодил ҷамъ шавам чун ба ту танҳо машғӯл

بادل جمع شوم چون به تو تنها مشغول

Хизмати давр ба наздик наме фармойанд

خدمت دور به نزدیک نمی فرمایند

Аҳли дилро накунад ишқ ба дунёи машғӯл

اهل دل را نکند عشق به دنیا مشغول

Монад аз ҷилва бе қимати Юсуфи маҳрӯм

ماند از جلوه بی قیمت یوسف محروم

Ҳарки дрқоФлаҳ гардид ба савдои машғӯл

هرکه درقافله گردید به سودا مشغول

Монад чун оина дар доираи ҳайронӣ

ماند چون آینه در دایره حیرانی

Ҳарки аз сода дилӣ шуд ба тамошои машғӯл

هرکه از ساده دلی شد به تماشا مشغول

Қисмати дидаи з ҳар узви ҷудо май гирам

قسمت دیده ز هر عضو جدا می گیرم

Ба тамошои туами бас ки саропои машғӯл

به تماشای توام بس که سراپا مشغول

Ҳар нафаси ишқи ду сад нақши бадеъи ангезад

هر نفس عشق دو صد نقش بدیع انگیزد

То нагардад ба худ он оинаи симои машғӯл

تا نگردد به خود آن آینه سیما مشغول

намешавад соиб аз андешаи дунёи фориғ

می شود صائب از اندیشه دنیا فارغ

Шуд дил ҳар ки ба андешаи уқбои машғӯл

شد دل هر که به اندیشه عقبی مشغول