Булъаҷаби маҷмӯъаҳо аз каф ба ҳасрат дода ам

بوالعجب مجموعه‌ها از کف به حسرت داده‌ام

Ҳосили умри гиромиро ба ғорат дода ам

حاصلِ عمرِ گرامی را به غارت داده‌ام

То чаро гул ба чашми худ надодами ҷой ӯ

تا چرا چون گل به چشمِ خود ندادم جایِ او

Хори мижгонро ба сайлоб надомат дода ам

خارِ مژگان را به سیلابِ ندامت داده‌ام

Бочаҳ рӯ дар чори сӯии Мисри дукони вокнм

با چه رو در چار سویِ مصر، دکان واکُنَم؟

Корвони ҳасани Юсуфро ба ғорат дода ам

کاروانِ حُسنِ یوسف را به غارت داده‌ام

Мабдаи файёз агар бо ман кунад хасмӣ равост

مَبْدأِ فَیّاض اگر با من کُنَد خصمی رواست

Бовуҷӯди ҳасани маънии дил ба сӯрат дода ам

با وجودِ حُسنِ معنی، دل به صورت داده‌ام

Мардуми озодаро як ҷома чун срўмсти бас

مردمِ آزاده را یک جامه چون سرو است بس

Кофарам дар умри худ гртн ба зинат дода ам

کافِرم در عمرِ خود گر تن به زینت داده‌ام

Чашм он дорам ки аз малик асар ёбад нишон

چشمِ آن دارم که از مُلْکِ اثر یابد نشان

Аз таҳи дили гиряро имрӯз рухсат дода ам

از تهِ دل، گریه را امروز رخصت داده‌ام

Чархро бар хештани фармонраво гардонда ам

چرخ را بر خویشتن فرمان‌روا گردانده‌ام

Теғи бирҳмӣ ба даст бемурувват дода ам

تیغِ بی‌رحمی، به دستِ بی‌مروت داده‌ام

Узри хоҳи маъсияти ашки пушаймонӣ бас аст

عذرخواهِ معصیت، اشکِ پشیمانی بس است

Номаи худро ба дасти абр раҳмат дода ам

نامه‌یِ خود را به دستِ ابرِ رحمت داده‌ام

Соиби ин шеъртар оташи забонро гӯш кун

«صائب»، این شعرِ ترِ آتش‌زبان را گوش کن

То бадоне дар сухан дод фасоҳат дода ам

تا بدانی در سخن، دادِ فصاحت داده‌ام