Ду олам шуд зи ёди он самани симои фаромӯшам
دو عالم شد ز یاد آن سمن سیما فراموشم
Ба хотир ончӣ мегардид шуд якҷои фаромӯшам
به خاطر آنچه می گردید شد یکجا فراموشم
намегардад зи хотири маҳв чун мисра баланд уфтад
نمی گردد ز خاطر محو چون مصرع بلند افتد
Шудам хок ва нашуд он қомати раънои фаромӯшам
شدم خاک و نشد آن قامت رعنا فراموشم
Чаҳ фориғи бол май гаштами дарин олам агар ме шуд
چه فارغ بال می گشتم درین عالم اگر می شد
Ғами имрӯз чун андешаи фардои фаромӯшам
غم امروز چون اندیشه فردا فراموشم
зи чашми он кас ки давр афтод гардад аз фаромӯшон
ز چشم آن کس که دور افتاد گردد از فراموشان
Ман аз хорӣ ба пеши чашм аз дилҳо фаромӯшам
من از خواری به پیش چشم از دلها فراموشم
Сапанд ӯ шудам то аз худии осон бурун оем
سپند او شدم تا از خودی آسان برون آیم
Надонистам шавад бархестан аз ҷои фаромӯшам
ندانستم شود برخاستن از جا فراموشم
Чу гавҳар гарчи дар маҳди садаф умрӣаст дар хобам
چو گوهر گرچه در مهد صدف عمری است در خوابم
Нашуд зини хоби сангини рағбати дарёи фаромӯшам
نشد زین خواب سنگین رغبت دریا فراموشم
зи ман як зарра то дар санг бошад чун шарари боқӣ
ز من یک ذره تا در سنگ باشد چون شرر باقی
Нахоҳад шуд ҳавои олами болои фаромӯшам
نخواهد شد هوای عالم بالا فراموشم
На аз манзил на аз раҳ , на зи ҳамроҳон хабар дорам
نه از منزل نه از ره، نه ز همراهان خبر دارم
Ман он кӯрам ки раҳбар карда дар саҳрои фаромӯшам
من آن کورم که رهبر کرده در صحرا فراموشم
Ба ёди ман ки пеши он Фромшкор ме уфтад
به یاد من که پیش آن فرامشکار می افتد
Ки бо сад ришта кард он зулф бе парвои фаромӯшам
که با صد رشته کرد آن زلف بی پروا فراموشم
Ба истиғнои тавон хӯн дар ҷигар кардани накӯён ро
به استغنا توان خون در جگر کردن نکویان را
Вале аз диданаш мегардад истиғнои фаромӯшам
ولی از دیدنش می گردد استغنا فراموشم
Марои ин сарфарозӣ дар миёни даври гардони бас
مرا این سرفرازی در میان دور گردان بس
Ки кард он сангдил аз дӯстон танҳо фаромӯшам
که کرد آن سنگدل از دوستان تنها فراموشم
Ба ашкӣ ме тавон шустани зи хоками даъвии хӯн ро
به اشکی می توان شستن ز خاکم دعوی خون را
Пас аз гаштан макун эй шамъ бе парвои фаромӯшам
پس از کشتن مکن ای شمع بی پروا فراموشم
Ним ман донае соиби бисоти офариниш ро
نیم من دانه ای صائب بساط آفرینش را
Ки дар хок фаромӯшон кунад дунёи фаромӯшам
که در خاک فراموشان کند دنیا فراموشم