Ман на онам ки чу гулчин дар гулзори занам
من نه آنم که چو گلچین در گلزار زنم
Даст дар домани маъшӯқи хасу хори занам
دست در دامن معشوق خس و خار زنم
Муддат омадан ва рафтани айёми баҳор
مدت آمدن و رفتن ایام بهار
Он қадр нест ки гул бар сари дастори занам
آنقدر نیست که گل بر سر دستار زنم
Ман ки озор ба арбоб ҳавас напасандам
من که آزار به ارباب هوس نپسندم
Гул чаро бар қафаси мурғи гирифтори занам ?
گل چرا بر قفس مرغ گرفتار زنم؟
Ҳадафи чашми баду нек шудан душвораст
هدف چشم بد و نیک شدن دشوارست
Ба аз он нест ки ойӣна ба зангори занам
به از آن نیست که آیینه به زنگار زنم
Дили тасбеҳи з бе қайдии ман сӯрох аст
دل تسبیح ز بی قیدی من سوراخ است
Даст чун дар камари риштаи зуннори занам ?
دست چون در کمر رشته زنار زنم؟
Бетаваққуф ба таҳ хок равад чун қорун
بی توقف به ته خاک رود چون قارون
Ман ба ин дард агар такя ба кҳсори занам
من به این درد اگر تکیه به کهسار زنم
Ба хамӯшӣ бигзоред дили зори маро
به خموشی بگذارید دل زار مرا
Хӯн илм гардад агар захмаи барои йени тори занам
خون علم گردد اگر زخمه برا ین تار زنم
Май рӯми соиби азин олами афсурдаи бурун
می روم صائب ازین عالم افسرده برون
Нони худ чанд чу хуршед ба девори занам ?
نان خود چند چو خورشید به دیوار زنم؟