Чаҳ буд ҳастӣ фонӣ ки нисор ту кунам ?

چه بود هستی فانی که نثار تو کنم؟

Ин зари қалб чаҳ бошад ки ба кор ту кунам ?

این زر قلب چه باشد که به کار تو کنم؟

Ҷони боқӣ ба ман аз бӯсаи каромати фармой

جان باقی به من از بوسه کرامت فرمای

То ба шукронаи ҳамон лаҳзаи нисор ту кунам

تا به شکرانه همان لحظه نثار تو کنم

Ҳамаи шаби ҳолаи сифати гирд дилам ме гардад

همه شب هاله صفت گرد دلم می گردد

Ки зи оғӯши худ эй моҳи ҳисор ту кунам

که ز آغوش خود ای ماه حصار تو کنم

Чун сари зулфи умеди ман ноком ин аст

چون سر زلف امید من ناکام این است

Ки шабии рӯз дар оғӯшу канор ту кунам

که شبی روز در آغوش و کنار تو کنم

Дом ман нест ба оҳӯии ту лоиқ , бигзор

دام من نیست به آهوی تو لایق، بگذار

То ба доми сари зулфи ту шикор ту кунам

تا به دام سر زلف تو شکار تو کنم

Зулф шуд чашми саропоу туро сайр надид

زلف شد چشم سراپا و ترا سیر ندید

Ман ба як дидаи чисони сайри изор ту кунам ?

من به یک دیده چسان سیر عذار تو کنم؟

Он қадр бош ки холӣ кунам аз гиряи дилӣ

آنقدر باش که خالی کنم از گریه دلی

Нест чун гавҳари дигар ки нисор ту кунам

نیست چون گوهر دیگر که نثار تو کنم

Ман ва бе рӯй ту назораи Юсуф , ҳайҳот

من و بی روی تو نظاره یوسف، هیهات

Чун ба ин ҷоми тиҳии дафъи хумор ту кунам ?

چون به این جام تهی دفع خمار تو کنم ؟

Ҳоши ллаҳ ки ба рухсор биҳишт андозам

حاش لله که به رخسار بهشت اندازم

Дидаеро ки мунаққаш банигор ту кунам

دیده ای را که منقش به نگار تو کنم

Ҳамчунон бар кафи пои ту дилам ме ларзад

همچنان بر کف پای تو دلم می لرزد

Агар аз пардаи дили роҳгзор ту кунам

اگر از پرده دل راهگذار تو کنم

Кам нашуд дарди ту соиб ба мудовои субҳ

کم نشد درد تو صائب به مداوای صبح

Ман чаҳ тадбири дили хастаи зор ту кунам ?

من چه تدبیر دل خسته زار تو کنم؟

Хониш
ғзл шморҳ 117 — прӣ соткнӣ ъндлӣб