Манам ки аз ҷигари лолаи доғ май дуздам

منم که از جگر لاله داغ می دزدم

Фурӯғ аз гуҳари шаби чароғ май дуздам

فروغ از گهر شب چراغ می دزدم

Ба ним ҷунбиш абрӯ хамӯш май гирдам

به نیم جنبش ابرو خموش می گردم

Ба як насими нафас чун чароғ май дуздам

به یک نسیم نفس چون چراغ می دزدم

Агар ба маҷлис май сад ҳадис талх равад

اگر به مجلس می صد حدیث تلخ رود

Ба зирлби ҳамаро чун аёғ май дуздам

به زیرلب همه را چون ایاغ می دزدم

Суроғ мекунам аз мардумони нишони туро

سراغ می کنم از مردمان نشان ترا

Дигар зи рашки нишон аз суроғ май дуздам

دگر ز رشک نشان از سراغ می دزدم

зи доғ бенамакӣ чанд захми ман сӯзад

ز داغ بی نمکی چند زخم من سوزد

зи базми ишқи намакдони доғ май дуздам

ز بزم عشق نمکدان داغ می دزدم

Димоғи накҳати тунди насими зулфи крост

دماغ نکهت تند نسیم زلف کراست

зи буии себи занхдони димоғ май дуздам

ز بوی سیب زنخدان دماغ می دزدم

Дигар аҷаби гули доғӣ ба дасташ афтода аст

دگر عجب گل داغی به دستش افتاده است

зи соиби ин гуҳари шаби чароғ май дуздам

ز صائب این گهر شب چراغ می دزدم