Куҷост ҷазбаи ишқӣ ки бар канори рӯм

کجاست جذبه عشقی که بر کنار روم

Ба гӯша Эй биншинам ба фикри ёри рӯм

به گوشه ای بنشینم به فکر یار روم

Марои зи боди мухолиф чу мавҷ парво нест

مرا ز باد مخالف چو موج پروا نیست

Миёни кушода ба дарёии бикнори рӯм

میان گشاده به دریای بیکنار روم

Фазои чархи мақом нафас кашӣдан нест

فضای چرخ مقام نفس کشیدن نیست

Нафас куҷост ки бар боми ин ҳисори рӯм

نفس کجاست که بر بام این حصار روم

Маро ки дили хунак аз бргриз ме гардад

مرا که دل خنک از برگریز می گردد

зи нави баҳор чаҳ лозим ба зери бори рӯм

ز نو بهار چه لازم به زیر بار روم

Ба ихтиёри дарин анҷуман наёмада ам

به اختیار درین انجمن نیامده ام

Ки нақш чун нанишинад ба ихтиёри рӯм

که نقش چون ننشیند به اختیار روم

Дуои ҷавшани моҳии з муваҷҷаҳ хатараст

دعای جوشن ماهی ز موجه خطرست

Чигуна баҳри гузорам ба ҷӯйбори рӯм

چگونه بحر گذارم به جویبار روم

Маро ки ишқи саги остони худ хонда аст

مرا که عشق سگ آستان خود خوانده است

Чаҳ лоиқаст ба дунбол ҳар шикори рӯм

چه لایق است به دنبال هر شکار روم

Чу кӯҳи пушти сари сайл дидаам бисёр

چو کوه پشت سر سیل دیده ام بسیار

Сабки ним ки ба як ҷуръа чун хумори рӯм

سبک نیم که به یک جرعه چون خمار روم

Чу гули зи хурдаи ман рӯй боғ рангин аст

چو گل ز خرده من روی باغ رنگین است

Равои мадор ки аз кӣсаи баҳори рӯм

روا مدار که از کیسه بهار روم

Дарин риёзи ман он шабнами гронҷонм

درین ریاض من آن شبنم گرانجانم

Ки дар хазон ба шукри хоби навбаҳори рӯм

که در خزان به شکر خواب نوبهار روم

Ҳмонқдри раги хоби марои мгир эй бахт

همانقدر رگ خواب مرا مگیر ای بخت

Ки зери сояи он сарви пойдори рӯм

که زیر سایه آن سرو پایدار روم

Хумори ман ба май лола гаван наме шаканд

خمار من به می لاله گون نمی شکند

Магар ба фикри лаби лаъли оннигор рӯм

مگر به فکر لب لعل آن نگار روم

зи санги нолаи براردи видоъи ман чун сайл

ز سنگ ناله برآرد وداع من چون سیل

Қиёматаст чу ман аз диёри ёри рӯм

قیامت است چو من از دیار یار روم

зи ман шикаст ба душман намерасад соиб

ز من شکست به دشمن نمی رسد صائب

Сабк чу накҳати гул бар бисоти хори рӯм

سبک چو نکهت گل بر بساط خار روم