Ман он ним ки ба гулшан ба ихтиёри рӯм

من آن نیم که به گلشن به اختیار روم

Магари збихбриҳо ба буии ёри рӯм

مگر زبیخبریها به بوی یار روم

Ба обу ранги марои навбаҳори нФрибд

به آب و رنگ مرا نوبهار نفریبد

Ба завқи доғи магари сӯии лолаи зори рӯм

به ذوق داغ مگر سوی لاله زار روم

Дилам гирифт азин сояҳои по ба рикоб

دلم گرفت ازین سایه های پا به رکاب

Ба зери сояи он сарви пойдори рӯм

به زیر سایه آن سرو پایدار روم

Хумори муваҷҷаҳи ман аз канор афзӯн шуд

خمار موجه من از کنار افزون شد

Бағали кушода ба дарёии бикнори рӯм

بغل گشاده به دریای بیکنار روم

зи иштиёқи ҳамон ҳалқаи буруни дирам

ز اشتیاق همان حلقه برون درم

Агар ба хилвати оғӯши оннигор рӯм

اگر به خلوت آغوش آن نگار روم

Дили рамидаи ман он замон баҷо ояд

دل رمیده من آن زمان بجا آید

Ки ҳамчуи шона дар он зулфи тобдори рӯм

که همچو شانه در آن زلف تابدار روم

Марои азони сафари бихўдии хуш омада аст

مرا ازآن سفر بیخودی خوش آمده است

Ки рафтаи рафтаи азин роҳи сӯии ёри рӯм

که رفته رفته ازین راه سوی یار روم

Чунон фитодаам аз по ки вақти беҳӯшӣ

چنان فتاده ام از پا که وقت بیهوشی

Ба дасту дӯши насими саҳари зи кори рӯм

به دست و دوش نسیم سحر ز کار روم

Ба хоксории худ чун ғубор аз он шодам

به خاکساری خود چون غبار از آن شادم

Ки дар рикоби ту эй нозанини савори рӯм

که در رکاب تو ای نازنین سوار روم

Агар чаҳ сайди забунам , вале мурувват нест

اگر چه صید زبونم، ولی مروت نیست

Ки ташна аз лаби он теғи обдори рӯм

که تشنه از لب آن تیغ آبدار روم

зи зулмат шаб ҳастӣ магари буруни соиб

ز ظلمت شب هستی مگر برون صائب

Ба равшанои он оташини изори рӯм

به روشنایی آن آتشین عذار روم