Дарин ҷаҳон нашавад ҳоли он ҷаҳони маълум
درین جهان نشود حال آن جهان معلوم
Ки мағзро натавон кард аз устихони маълум
که مغز را نتوان کرد از استخوان معلوم
Ки дида ҳошия бошад зи матни мушкилтар ?
که دیده حاشیه باشد ز متن مشکلتر؟
Нашуд зи сабзаи хати рози он даҳони маълум
نشد ز سبزه خط راز آن دهان معلوم
Айёри нози турои аҳл ишқ ме донанд
عیار ناز ترا اهل عشق می دانند
Ки бекашиш нашавад зӯр ҳар камони маълум
که بی کشش نشود زور هر کمان معلوم
Агар чаҳ маънӣ нозук шавад бараҳнаи злФз
اگر چه معنی نازک شود برهنه زلفظ
Маро нашуд зи камари ҳеҷ азон миёни маълум
مرا نشد ز کمر هیچ ازان میان معلوم
зи шавқи ман чаҳ тавонад забон хома навишт ?
ز شوق من چه تواند زبان خامه نوشت؟
Замир лол нагардад ба тарҷумони маълум
ضمیر لال نگردد به ترجمان معلوم
Тавон зи сахтии айёми сабр ҳар кас ёфт
توان ز سختی ایام صبر هر کس یافت
Айёр зар шавад аз санги имтиҳони маълум
عیار زر شود از سنگ امتحان معلوم
Ҷунуни ман ба хати сабзи глрхон баста аст
جنون من به خط سبز گلرخان بسته است
Ки дар баҳор шавад шӯри булбулони маълум
که در بهار شود شور بلبلان معلوم
зи ҳасани оқибати оғозро тавон дарёфт
ز حسن عاقبت آغاز را توان دریافت
Ки ҳаст тири каҷу рост дар нишони маълум
که هست تیر کج و راست در نشان معلوم
зи ашки рози дили биқрор ман шуд фош
ز اشک راز دل بیقرار من شد فاش
Ки аз ситора шавад сайри осмони маълум
که از ستاره شود سیر آسمان معلوم
Баландии сухани дилпазири мо соиб
بلندی سخن دلپذیر ما صائب
зи гирд серума нагардад дар Исфаҳони маълум
ز گرد سرمه نگردد در اصفهان معلوم