зи бӯстони ту ишқ баланд ме гӯям
ز بوستان تو عشق بلند می گویم
Чу шабнам аз гул рӯй ту даст ме шавем
چو شبنم از گل روی تو دست می شویم
наме тавон дили мардуми рабӯд ва пас хам зад
نمی توان دل مردم ربود و پس خم زد
Саводи зулфи турои мӯ бмўӣ ме ҷӯям
سواد زلف ترا مو بموی می جویم
зи бас ки ташнаи буии вафои ноёбм
ز بس که تشنه بوی وفای نایابم
Ба дастам ар гул коғаз диҳанд ме бӯем
به دستم ار گل کاغذ دهند می بویم
Ҳарифи рашки насими дарози дасти ним
حریف رشک نسیم دراز دست نیم
Ҳинои байъати гулро з даст ме шавем
حنای بیعت گل را ز دست می شویم
Вафоу мардумӣ аз рӯзгор дорам чашм
وفا و مردمی از روزگار دارم چشم
Бибин зи содаи длиҳо чаҳ аз ки ме ҷӯям
ببین ز ساده دلیها چه از که می جویم
Миёни ӣнҳамаи нозуки табиатони соиб
میان اینهمه نازک طبیعتان صائب
Манам ки шеъри зФрхон писанд ме гӯям
منم که شعر ظفرخان پسند می گویم