Зиҳии зи софии чашми ту чашми ҷони равшан

زهی ز صافی چشم تو چشم جان روشن

Насими пеши хироми ту буии пероҳан

نسیم پیش خرام تو بوی پیراهن

Азон ҳамешатар ва тозааст сунбули зулф

ازان همیشه تر و تازه است سنبل زلف

Ки беҳиҷоб кунад бо ту даст дар гардан

که بی حجاب کند با تو دست در گردن

зи хок , дасту гиребон ба сарв бархезад

ز خاک، دست و گریبان به سرو برخیزد

Ба хок ҳар ки шавад қомати ту соя фикан

به خاک هر که شود قامت تو سایه فکن

зи барги лолаи ин боғ срсрӣ магзар

ز برگ لاله این باغ سرسری مگذر

Ки лайлеи сари маҷнӯни ниҳода дар доман

که لیلیی سر مجنون نهاده در دامن

Ту кистӣ ки кунӣ сари бараҳнаи ҳамчуи ҳубоб

تو کیستی که کنی سر برهنه همچو حباب

Дар он фазо ки нагардад муҳӣт бе ҷавшан

در آن فضا که نگردد محیط بی جوشن

Ба ӣнқадар ки зи дил бар сар забон омад

به اینقدر که ز دل بر سر زبان آمد

Чу офтоб ба гирди ҷаҳони давиди сухан

چو آفتاب به گرد جهان دوید سخن

СФи расонади Хизрро ба чашмаи ҳайвон

سف رساند خضر را به چشمه حیوان

Ба меҳр , чашм масеҳо шуд аз сафари равшан

به مهر، چشم مسیحا شد از سفر روشن

Набарди занги зи ойӣнаи дили ёқӯб

نبرد زنگ ز آیینه دل یعقوب

Насими Мисри сафар то накард аз маскан

نسیم مصر سفر تا نکرد از مسکن

Ҷавоби он ғазаласт ин соиби мавлавӣ

جواب آن غزل است این صائب مولوی

Ки ӯ чу оинаи ҳам нотиқаст ва ҳам алкн

که او چو آینه هم ناطق است و هم الکن