Як соФдл дар анҷумани рӯзгори кӯ ?
یک صافدل در انجمن روزگار کو؟
Олам гирифт тирагии ойӣнаи дори кӯ ?
عالم گرفت تیرگی آیینه دار کو؟
Ҳар ҷо ки ҳаст софи замирӣ шикаста аст
هر جا که هست صاف ضمیری شکسته است
Ойӣнаи дурусти дарин Зангбори кӯ ?
آیینه درست درین زنگبار کو؟
Чун рег , ташнаанд ҳарифон ба хӯни ҳам
چون ریگ، تشنه اند حریفان به خون هم
Дар қулзуми фалаки гуҳари обдори кӯ ?
در قلزم فلک گهر آبدار کو؟
Хунини дилӣ чу нофаи дарин дашти пуршикор
خونین دلی چو نافه درین دشت پرشکار
КооФоқро кунад ба нафаси мшкбори кӯ ?
کاآفاق را کند به نفس مشکبار کو؟
То теғи каҳкашони бадари оради зи дасти чарх
تا تیغ کهکشان بدر آرد ز دست چرخ
Як марди саргузаштаи дарин рӯзгори кӯ ?
یک مرد سرگذشته درین روزگار کو؟
Бе хӯни дили зи чархи фароғати тамаъи мадор
بی خون دل ز چرخ فراغت طمع مدار
Бар хон сифлаи неъмат бе интизори кӯ ?
بر خوان سفله نعمت بی انتظار کو؟
Парвона то ба шамъ расед орамида шуд
پروانه تا به شمع رسید آرمیده شد
Дарёӣ бе қарории моро канори кӯ ?
دریای بی قراری ما را کنار کو؟
эй он ки дами зи раҳравии ишқ май занӣ
ای آن که دم ز رهروی عشق می زنی
Дар пардаи назар , асари захми хори кӯ ?
در پرده نظر، اثر زخم خار کو؟
Чун шамъ агар туро ба ҷигар ҳаст оташӣ
چون شمع اگر ترا به جگر هست آتشی
Ранги шикастау мижаи ашкбори кӯ ?
رنگ شکسته و مژه اشکبار کو؟
То сабр ҳаст дард ба дармон наме расад
تا صبر هست درد به درمان نمی رسد
Дардӣ ки аз шикеби براردи дамори кӯ ?
دردی که از شکیب برآرد دمار کو؟
Таби ларзаи офтоби ҷаҳонро гирифта аст
تب لرزه آفتاب جهان را گرفته است
Ҳангомаи гарми сози дарин рӯзгори кӯ ?
هنگامه گرم ساز درین روزگار کو؟
Дар оташаст наъли сафари кӯҳи тавр ро
در آتش است نعل سفر کوه طور را
Дар зери бори ишқи тани бурдбори кӯ ?
در زیر بار عشق تن بردبار کو؟
Чун шамъи зери домани саҳрои рӯзгор
چون شمع زیر دامن صحرای روزگار
Монанди лолаи як ҷигари доғдори кӯ ?
مانند لاله یک جگر داغدار کو؟
Носеҳи абаси зи реги равон сбҳаҳ ме занад
ناصح عبث ز ریگ روان سبحه می زند
Доғи даруни сӯхтагонро шумори кӯ ?
داغ درون سوختگان را شمار کو؟
Давлат буд ба пои ту мурдан ба ихтиёр
دولت بود به پای تو مردن به اختیار
Аммо ниёзманди турои ихтиёри кӯ ?
اما نیازمند ترا اختیار کو؟
Ин он ғазал ки ҳазрат аттор гуфта аст
این آن غزل که حضرت عطار گفته است
Аз оташи самоъи дилӣ бе қарори кӯ ?
از آتش سماع دلی بی قرار کو؟