Рӯй замин ба зулфи мънбри гирифта Эй
روی زمین به زلف معنبر گرفته ای
Бо ин сипаҳ чаҳ малики муҳақари гирифта Эй
با این سپه چه ملک محقر گرفته ای
Чашми ситамгари ту куҷо , мардумии куҷо
چشم ستمگر تو کجا، مردمی کجا
Бодоми талхро чаҳ ба шукри гирифтае ?
بادام تلخ را چه به شکر گرفته ای؟
Ҳайф оядат ба қимати дили хок агар диҳӣ
حیف آیدت به قیمت دل خاک اگر دهی
Чун гули паии фиреб ба кафи зари гирифта Эй
چون گل پی فریب به کف زر گرفته ای
Хуршедро ба ҳалқаи фитроки баста Эй
خورشید را به حلقه فتراک بسته ای
Имрӯз чун шикории лоғари гирифтае ?
امروز چون شکاری لاغر گرفته ای؟
Дар обу оташами мФкни рӯзи бозхост
در آب و آتشم مفکن روز بازخواست
Чун дар азали зи хоки марои баргирифта Эй
چون در ازل ز خاک مرا برگرفته ای
Оташи зи нағмаи туам эй не ба ҷон фитод
آتش ز نغمه توام ای نی به جان فتاد
Ин чошнии зи лаъл ки дигари гирифтае ?
این چاشنی ز لعل که دیگر گرفته ای؟
Лавҳи мазори душмани беҳуда гӯ шавад !
لوح مزار دشمن بیهوده گو شود!
Ин соя эй ки аз сари мо баргирифта Эй
این سایه ای که از سر ما برگرفته ای
Соиби ту аз куҷо , равиши мавлавии куҷо ?
صائب تو از کجا، روش مولوی کجا؟
Чун пардаи ҳаёи зи миёни баргирифтае ?
چون پرده حیا ز میان برگرفته ای؟