Соқии дарди кашони дай дар майхона гушӯд
ساقی درد کشان دی در میخانه گشود
Ошноӣии назари лутф ба бегона гушӯд
آشنائی نظر لطف به بیگانه گشود
Барад дар пои хам ва бар дили паймони шиканам
برد در پای خم و بر دل پیمان شکنم
Уқдаҳо буд басии боз ба паймона гушӯд
عقدهها بود بسی باز به پیمانه گشود
Дил шуд озод чу ӯ аз шикани зулфи бхол
دل شد آزاد چو او از شکن زلف بخال
Гиреҳу силсилау хами басар шона гушӯд
گره و سلسله و خم بسر شانه گشود
Доми бодонаи баҳри мурғи зиён буду маро
دام بادانه بهر مرغ زیان بود و مرا
Кори мурғи дили азин дом ки бо дона гушӯд
کار مرغ دل ازین دام که با دانه گشود
Кард девонаам аз ишқ ва барин гӯнаи зард
کرد دیوانه ام از عشق و برین گونه زرد
Чашм во карду шифохона девона гушӯд
چشم وا کرد و شفاخانه دیوانه گشود
Ман паии ганҷи ғами ишқи ту вайрона шудам
من پی گنج غم عشق تو ویرانه شدم
Мисласт инки дар ганҷ бўиронаҳ гушӯд
مثلست اینکه در گنج بویرانه گشود
Ёр бо ман суханӣ гуфту з ҳар узви маро
یار با من سخنی گفت و ز هر عضو مرا
Бнўонтқ чу аз астн ҳаннона гушӯд
بنوانطق چو از استن حنانه گشود
Ақл ҳар уқдаи бакори сар онзлФ фиканд
عقل هر عقده بکار سر آنزلف فکند
Шонаи ишқи қавии даст бдндонаҳ гушӯд
شانه عشق قوی دست بدندانه گشود
Дар самои ҷустам ва дар сина ман дошт ватан
در سما جستم و در سینه من داشت وطن
Ончӣ аз шаҳри бнгшўди з кошона гушӯд
آنچه از شهر بنگشود ز کاشانه گشود
Дар шаби тираи дилам буд чу парвона бабанд
در شب تیره دلم بود چو پروانه ببند
Шамъ равшан шуду боли пар парвона гушӯд
شمع روشن شد و بال پر پروانه گشود
Файзи барадами зи ҳазорон дар дили бози бҷд
فیض بردم ز هزاران در دل باز بجد
Чун талаб кард дар файз ҷудогона гушӯд
چون طلب کرد در فیض جداگانه گشود
Дида будам ки буд ҷойгаҳаши соиди шоҳ
دیده بودم که بود جایگهش ساعد شاه
Боли он рӯз ки шаҳбози ман аз лона гушӯд
بال آن روز که شهباز من از لانه گشود
Қуфли ғам буд сафоро бадал аз дасти дўӣӣ
قفل غم بود صفا را بدل از دست دوئی
Нафаси пери ҳам аз ҳиммат мардона гушӯд
نفس پیر هم از همت مردانه گشود