Русумот улӯм омад машоир
رسومات علوم آمد مشاعر
Дар инсонгар шуъӯрат ҳаст ҳозир
در انسان گر شعورت هست حاضر
Русумат ҳаст асмоءи илоҳӣ
رسومت هست اسماء الهی
Ки зоҳир дар мазоҳир шуд кмоҳӣ
که ظاهر در مظاهر شد کماهی
зи илму самъу бениш дар муқобил
ز علم و سمع و بینش در مقابل
Шӣўнотӣ намӯд андари ҳёи кул
شئوناتی نمود اندر هیا کل
Чаҳ ҳайкали парда доролқрор аст
چه هیکل پرده دارالقرار است
Миёни ҳақу халқи он мустаъор аст
میان حق و خلق آن مستعار است
зи мо байни ин ҳиҷоб ар муртафаъ шуд
ز ما بین این حجاب ار مرتفع شد
Аёни гашт ончӣ дидаш мумтанеъ шуд
عیان گشت آنچه دیدش ممتنع شد
Аз ин дарёб срмни урф ро
از این دریاب سرمن عرف را
Шиноси он нафас бар ҳақи муттасиф ро
شناس آن نفس بر حق متصف را